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दुर्ग। छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग में रहते हुए विवादों में रही और बाद में बर्खास्त की गई महिला पुलिसकर्मी मोनिका गुप्ता उर्फ मोनिका सोनी एक बार फिर ठगी के मामले में गिरफ्तार हुई है। इस बार उस पर एक महिला को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने का आरोप है। मामले में पुलगांव पुलिस ने मोनिका गुप्ता के साथ इसरार खान को भी गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, ग्राम चंदखुरी निवासी किरण चंद्राकर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पति की पहचान इसरार खान से थी। इसरार ने खुद की बड़े अधिकारियों से अच्छी पहचान होने का दावा करते हुए किरण को नगर सेना में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था। इसके बदले उसने किरण से 6 लाख 30 हजार रुपये लिए।
हालांकि, काफी समय बीतने के बाद भी किरण की नौकरी नहीं लगी। इसरार ने बाद में 50 हजार रुपये वापस कर दिए और बाकी रकम लौटाने से बचता रहा। जब किरण ने अपने पैसे वापस मांगे तो इसरार ने कहा कि अब वह उनकी नौकरी नहीं लगवा पाएगा।
इसरार ने मोनिका से कराई मुलाकात
इसके बाद इसरार खान ने किरण की मुलाकात मोनिका गुप्ता से कराई। इसरार ने मोनिका के बारे में भी दावा किया कि उसकी बड़े अधिकारियों से अच्छी पहचान है और वह नौकरी लगवाने में मदद कर सकती है।
मोनिका ने किरण को भरोसा दिलाया कि वह उसे लैब ऑपरेटर के पद पर नौकरी दिलवा देगी। इतना ही नहीं, उसने नौकरी लगने के बाद दुर्ग शहर में ट्रांसफर कराने का भी आश्वासन दिया।
मोनिका की बातों पर भरोसा करके किरण ने उसे कुल 5 लाख 42 हजार रुपये दे दिए। इसमें 5 लाख 12 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए, जबकि 30 हजार रुपये नकद दिए गए।
नौकरी नहीं लगी तो पैसे मांगने लगी महिला
पैसे लेने के बाद मोनिका ने नौकरी लगवाने की बात कहकर किरण को लगातार समय दिया, लेकिन नौकरी नहीं लग पाई। जब किरण ने अपने पैसे वापस मांगे तो वह कथित तौर पर लगातार टालमटोल करती रही।
काफी समय तक पैसे वापस नहीं मिलने और नौकरी भी नहीं लगने के बाद किरण ने पूरे मामले की शिकायत पुलगांव थाने में की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मामले में मोनिका गुप्ता और इसरार खान की भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पहले भी नौकरी के नाम पर ठगी का केस
मोनिका गुप्ता के खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अगस्त 2024 में छावनी थाने में उसके खिलाफ नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था।
लगातार सामने आ रहे विवादों और मामलों के बीच पुलिस विभाग ने 2025 में मोनिका को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
आरक्षक से हवलदार बनी, फिर हुई बर्खास्त
मोनिका गुप्ता पहले पुलिस विभाग में आरक्षक के रूप में कार्यरत थी और बाद में हवलदार के पद तक पहुंची। हालांकि, पुलिस सेवा के दौरान और उसके बाद उसके खिलाफ कई मामले सामने आए।
उसका नाम करीब सात महीने पहले सामने आए एक पुराने चोरी के मामले में भी जुड़ा था। यह मामला 2022 में दुर्ग के सिंधिया नगर में हुई चोरी की जांच से संबंधित था।
पुलिस ने चोरी के आरोपी से करीब 79 ग्राम यानी लगभग 8 तोला सोने के जेवर और एक सोने का सिक्का बरामद किया था। आरोप था कि जब्ती के बाद इन आभूषणों को थाने के मालखाने में जमा करने के बजाय मोनिका ने अपने पास रख लिया।
बाद में चोरी की पीड़िता कोर्ट के आदेश के बाद बरामद जेवर लेने थाने पहुंची। वहां पता चला कि बरामद सोना मालखाने में जमा ही नहीं किया गया था। इसके बाद मोनिका के खिलाफ सबूत छिपाने और अमानत में खयानत से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया गया।
2 फरवरी 2026 को हुई थी गिरफ्तारी
मामला दर्ज होने के बाद मोनिका कुछ समय तक फरार रही। पुलिस ने उसे 2 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय वह करीब 9 महीने की गर्भवती थी।
गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद 10 फरवरी 2026 को जिला अस्पताल में उसने बेटे को जन्म दिया था।
अब एक बार फिर नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का मामला सामने आने के बाद मोनिका पुलिस कार्रवाई के घेरे में है। इस मामले में पुलिस ने उसके साथ इसरार खान को भी गिरफ्तार किया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।