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जबलपुर: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त (रद्द) कर दिया गया है। इस बात की जानकारी जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट कहा
लोकतंत्र में तथ्यों को छिपाने की गुंजाइश नहीं है।
सांसद राकेश सिंह ने लिखा, भाजपा प्रत्याशी महेश केवट ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक आपत्ति दर्ज कराई थी। इस आपत्ति में आरोप लगाया गया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी शपथ पत्र में तेलंगाना में दर्ज एक आपराधिक मामले (आपराधिक प्रकरण) की जानकारी को छुपाया और उसका उल्लेख नहीं किया। निर्वाचन अधिकारी ने इस आपत्ति की पूरी जांच की और इसे सही पाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद राकेश सिंह ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) और निर्वाचन आयोग के नियमों का हवाला दिया। उन्होंने लिखा “प्रत्येक प्रत्याशी को अपने नामांकन पत्र एवं शपथ पत्र में सभी आवश्यक जानकारियां पूर्ण एवं सत्य रूप से प्रस्तुत करनी होती हैं। लोकतंत्र में पारदर्शिता सर्वोपरि है और तथ्यों को छिपाने की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती।”
उन्होंने आगे कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के तीनों राज्यसभा प्रत्याशियों के निर्विरोध (Unopposed) निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया। भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों की बड़ी जीत बताया है।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस खेमे में भारी निराशा है, जबकि भाजपा खेमे में निर्विरोध जीत को लेकर उत्साह का माहौल है।
