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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच देशभर में जारी एलपीजी संकट में बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लाइबेरिया के झंडे तले चलने वाला ऑयल टैंकर 'शेनलॉन्ग सुएजमैक्स' गुरुवार को मुंबई पोर्ट पर पहुंचा। यह होर्मुज जलमार्ग से गुजरकर भारत आने वाला पहला जहाज है, जो 28 फरवरी के बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित बाहर आया।
इस टैंकर में 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल है, जिसे पूर्वी मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों तक भेजा जाएगा। यह तेल अगले कुछ दिनों में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी आपूर्ति को स्थिर करने में मदद करेगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागचक से बातचीत कर भारत के लिए होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर चर्चा की। ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस दिशा में 20 टैंकरों की आवाजाही सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद हैं।
जानकारी के अनुसार, यह ऑयल टैंकर 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा पोर्ट से रवाना हुआ था। 8-9 मार्च को जब यह होर्मुज के सबसे खतरनाक हिस्से में पहुंचा, तो भारतीय कप्तान ने सुरक्षा के लिए AIS ट्रांसपोंडर बंद कर दिया। इस 'डार्क मोड' में जहाज न तो ईरानी नौसेना को दिखाई दे रहा था और न ही ट्रैकिंग एजेंसियों को, जिससे यह सुरक्षित हो गया।
होर्मुज पार करने के बाद 10 मार्च को जहाज फिर ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखा और 12 मार्च को मुंबई के जवाहर द्वीप पर लंगर डाला।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने मौजूदा हालात को दुनिया के लिए इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया था, लेकिन इस टैंकर की सुरक्षित पहुंच से भारत को आपूर्ति की चिंता कम हुई है।