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naveen jindal coal block allocation case summons
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के गारे पाल्मा 4/1 कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बड़ा कदम उठाते हुए उद्योगपति एवं सांसद नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख समेत अन्य आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने सीबीआई की ओर से दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को 17 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया है।
विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने कहा कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह आरोपपत्र प्राथमिकी दर्ज होने के एक दशक से अधिक समय बाद दाखिल किया गया है और इसे कोयला ब्लॉक मामलों के सबसे बड़े आरोपपत्रों में से एक माना जा रहा है।
अदालत ने मेसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल), उसके प्रबंध निदेशक नवीन जिंदल, पी.सी. पारेख, राकेश कुमार जिंदल, राम किशोर, एस.के. अग्रवाल और मेसर्स जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड (अब नलवा संस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड) को समन जारी किया है।
एक लाख से अधिक पन्नों का आरोपपत्र
अदालत के अनुसार, सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र में 778 दस्तावेज शामिल हैं, जिनकी कुल संख्या एक लाख से अधिक पृष्ठों की है। मामले में 234 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया है। न्यायाधीश ने कहा कि लंबी जांच प्रक्रिया और लोकसेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने में लगे समय के कारण आरोपपत्र दाखिल करने में काफी देरी हुई।
क्या है मामला?
यह मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के निर्देश पर शुरू हुई जांच से जुड़ा है। सीवीसी ने तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित की शिकायतों को आगे बढ़ाया था, जिनमें 1993 से 2005 के बीच 24 कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाए गए थे।
सीबीआई ने गारे पाल्मा 4/1 कोयला ब्लॉक के आवंटन से संबंधित जांच के आधार पर वर्ष 2014 में मामला दर्ज किया था। यह कोयला ब्लॉक तत्कालीन जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड को आवंटित किया गया था।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत कथित अपराधों का संज्ञान लिया है।
अब इस बहुचर्चित कोल ब्लॉक आवंटन मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी, जब सभी आरोपियों को अदालत में उपस्थित होना होगा।