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नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 को लेकर एक बहुत बड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ है। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आया है कि परीक्षा से पहले ही लीक पेपर करीब एक हजार से अधिक परीक्षार्थियों तक पहुँच चुका था। इस मामले में SOG ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
SOG के मुताबिक, सीकर के करियर काउंसलर राकेश मंडवारिया ने टेलीग्राम के जरिए 700 से अधिक छात्रों को करीब 410 सवालों का अभ्यास करवाया था। जांच में यह भी पाया गया कि माफियाओं ने "राजपाशा" और "प्राइवेट माफिया" नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे।
इन ग्रुप्स में करीब 400 से अधिक छात्र जुड़े थे। ग्रुप के कैप्शन में स्पष्ट लिखा था कि यह ग्रुप केवल परीक्षा पेपर अपलोड करने के लिए बनाया गया है।
इस पूरे पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड मांगीलाल और दिनेश बिवाल को बताया जा रहा है। जांच में चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि आरोपियों ने गुरुग्राम के यश यादव से करीब 45 लाख रुपये में पेपर का सौदा किया था। इसके बाद पेपर को आगे 30 लाख रुपये के अग्रिम भुगतान पर बेचा गया। छात्रों से इस पेपर के बदले 2 से 10 लाख रुपये तक वसूले गए।
हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी दिनेश बिवाल का परिवार पहले से ही चर्चा में था, क्योंकि उनके परिवार के 5 बच्चे MBBS कर रहे हैं। वर्ष 2025 में इंटरनेट मीडिया पर इस परिवार की काफी प्रशंसा हुई थी, लेकिन अब जांच में इस सफलता के पीछे पेपर लीक माफिया का हाथ होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
जांच एजेंसी के अनुसार, छात्रों को यह पेपर 'गेस पेपर' के नाम पर दिया गया था ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। हालांकि, परीक्षा के बाद मिलान करने पर असली पेपर के 120 सवाल इस लीक पेपर से पूरी तरह मेल खाते पाए गए।
SOG ने राकेश और तीन अन्य लोगों को हिरासत में लिया है। करीब 150 से अधिक छात्रों के नाम की सूची सीबीआई (CBI) को सौंपी गई है। आरोपियों के पास से 24 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें पेपर लीक से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।