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new world map un approved equal earth projection
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दुनिया के नक्शे को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सदियों से चली आ रही भौगोलिक विसंगतियों को दूर करते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर एक नए विश्व मानचित्र को अपनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नए नक्शे के तहत अब पारंपरिक 'मर्केटर प्रोजेक्शन' (Mercator Projection) के स्थान पर 'इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन' (Equal Earth Cartographic Projection) का उपयोग किया जाएगा।

नया मानचित्र और मतदान की स्थिति
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी द्वारा अफ्रीकी यूनियन (AU) के सदस्यों के समर्थन से पेश किए गए इस प्रस्ताव पर शुक्रवार, 4 सितंबर को मतदान हुआ। 193 सदस्य देशों वाले इस संगठन में प्रस्ताव को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, लेकिन इसे भारी समर्थन मिला:
कुल समर्थन: 164 देश (भारत, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम सहित)
विपक्ष: केवल 1 देश (संयुक्त राज्य अमेरिका)
अनुपस्थित / मतदान से दूरी: 6 देश
क्यों पड़ी नक्शा बदलने की जरूरत?
वर्ष 1569 में यूरोपीय नक्शा नवीनीकार (Map Maker) जेरार्डस मर्केटर (Gerardus Mercator) द्वारा बनाया गया मर्केटर मानचित्र पिछले 457 सालों से दुनिया का मानक नक्शा रहा है। इसे समुद्री नेविगेशन को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन यह पृथ्वी के सपाट कागजी चित्रण के कारण गंभीर भौगोलिक विकृतियां पैदा करता था।
गलत आकार: मर्केटर नक्शे में भूमध्य रेखा (Equator) से दूर स्थित देश और ध्रुवीय क्षेत्र अपने वास्तविक आकार से कई गुना बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के पास के महाद्वीप छोटे नजर आते हैं।
ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका का उदाहरण: पुराने नक्शे में ग्रीनलैंड (क्षेत्रफल: ~22 लाख वर्ग किमी) और अफ्रीका (क्षेत्रफल: ~3 करोड़ वर्ग किमी) लगभग एक ही आकार के दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है।
विकासशील क्षेत्रों की उपेक्षा: इस विकृति के कारण अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्र अपनी वास्तविक भौगोलिक महत्ता और क्षेत्रफल से बहुत छोटे प्रतीत होते थे।

विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएं
भारत का समर्थन: भारत ने नए नक्शे के पक्ष में मतदान किया। इस कदम का उद्देश्य ग्लोबल कार्टोग्राफिक प्रतिनिधित्व को संतुलित करना और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ और अफ्रीका के सटीक आकार को दुनिया के सामने लाना है।
फ्रांस की घोषणा: फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने समर्थन की घोषणा करते हुए कहा कि पुराना नक्शा रूस, चीन और अमेरिका को असामान्य रूप से बड़ा और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों को छोटा दिखाता था। नक्शा बदलने से दुनिया नहीं बदलेगी, लेकिन सच सामने आएगा।
अमेरिका का विरोध: अमेरिका इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाला इकलौता देश रहा। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेंसेविच ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र गंभीर वास्तविक वैश्विक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय 16वीं सदी के नक्शों पर बहस करके अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।
2018 में कार्टोग्राफर्स की एक टीम द्वारा विकसित 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' अब दुनिया भर की किताबों, शैक्षणिक संस्थानों और आधिकारिक मंचों पर पृथ्वी के अधिक यथार्थवादी और न्यायसंगत स्वरूप को प्रस्तुत करेगा।