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सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण हादसे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। बॉयलर ट्यूब फटने से हुए इस दर्दनाक हादसे में अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में मृतक और घायल मजदूरों को दिए गए मुआवजे की स्थिति, घायलों के उपचार और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, तथा हादसे के बाद प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा शामिल किया जाए।
जानकारी के अनुसार, प्लांट में अचानक बॉयलर ट्यूब फटने से अत्यधिक गर्म भाप तेजी से बाहर निकली, जिसकी चपेट में वहां कार्यरत कई मजदूर आ गए। हादसे के बाद प्लांट को तत्काल बंद कर ठंडा किया गया, जिसके बाद पुलिस और राहत दल ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया।
घायलों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कई घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि यदि मीडिया में प्रकाशित खबरें सही पाई जाती हैं, तो यह मजदूरों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। आयोग ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना जरूरी है।
इस घटना के बाद एक बार फिर प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा मानकों और बड़े उद्योगों में कामगारों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब राज्य सरकार द्वारा NHRC को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट से हादसे की असली वजह और जिम्मेदार पक्षों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।