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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशे की जड़ों को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त निर्देशों के बाद राजस्व विभाग और पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने संयुक्त रूप से “Opium Cultivation Investigation CG” अभियान को तेज कर दिया है।
यह अभियान उन जिलों पर केंद्रित है, जहां हाल के दिनों में अफीम और गांजे की अवैध खेती के मामले सामने आए हैं। शुरुआत दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ से हुई, जबकि ताजा मामला कोंडागांव के केशकाल विकासखंड का है, जहां मक्के की फसल के बीच छिपाकर गांजे की खेती की जा रही थी।
जांच में सामने आया है कि नशा तस्कर मक्के जैसी ऊंची फसलों की आड़ में अफीम और गांजा उगा रहे हैं। अभियान के तहत अब ऐसे सभी खेतों की सघन जांच की जा रही है, जहां मिश्रित खेती के नाम पर प्रतिबंधित पौधों की पैदावार हो रही है।
दुर्गम पहाड़ी और वन क्षेत्रों में नशा माफियाओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर ड्रोन तैनात किए गए हैं, जो फसलों के रंग और बनावट के आधार पर अफीम और गांजे की पहचान कर रहे हैं। चिन्हित फसलों को मौके पर ही नष्ट किया जा रहा है।
कार्रवाई सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है। रायपुर में सक्रिय दो बड़े ड्रग कारोबारियों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि ये कारोबारी ओडिशा के रास्ते प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई कर रहे थे और कानूनी व्यापार की आड़ में अवैध नेटवर्क चला रहे थे।
पुलिस मुख्यालय ने सभी आईजी और एसपी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नशा तस्करों के पक्ष में आने वाली किसी भी सिफारिश को नजरअंदाज किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अभियान में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को पूरी तरह ड्रग-फ्री बनाना है। इसके लिए अब कलेक्टर और एसपी को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है।