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रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के प्रतीक बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का निमंत्रण पत्र सौंपे जाने के दौरान केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन मौजूद रहे।

बस्तर की संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी अनूठी जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक सहभागिता के लिए देशभर में अलग पहचान रखता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के दौरान भी बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण बताया था।
उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था। ऐसे में मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय विरासत के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।
क्या है मुरिया दरबार?
बस्तर दशहरा की परंपराओं में मुरिया दरबार का विशेष महत्व है। यह बस्तर की सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था की जीवंत अभिव्यक्ति माना जाता है। इस आयोजन के जरिए पारंपरिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक प्रमुखों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है।
बस्तर के सामाजिक जीवन में मांझी और चालकी जैसे पारंपरिक पदों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रपति ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी इन पारंपरिक पदों की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका का उल्लेख किया था।
राष्ट्रपति की मौजूदगी पर क्या बोले मंत्री राजेश अग्रवाल?
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की ऐसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी पहचान देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी है। मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए गौरव का अवसर है।

उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। राष्ट्रपति की उपस्थिति से इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन के जरिए स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ाने पर भी काम कर रही है।
बस्तर से राष्ट्रपति का रहा है जुड़ाव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर की संस्कृति और जनजातीय विरासत से पहले भी जुड़ाव रहा है। फरवरी 2026 में उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। इस दौरान उन्होंने बस्तर की प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और गुफाओं को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया था।
इसके बाद जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी राष्ट्रपति ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित और संवर्धित करने के साथ जनजातीय समुदायों की विकास यात्रा में भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया था।
अब 23 अक्टूबर को जगदलपुर में होने वाला मुरिया दरबार राष्ट्रपति की मौजूदगी के कारण बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं के लिहाज से खास आयोजन बनने जा रहा है।