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raigarh ews land investigation notice issued to 5 colonizers september 22
रायगढ़। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित भूमि और निम्न आय वर्ग के भूखंडों के विक्रय से जुड़े नियमों के पालन को लेकर रायगढ़ जिले में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर चल रही जांच के तहत रायगढ़ SDM कार्यालय की ओर से ग्राम खैरपुर, पण्डरीपानी पूर्व, बड़े अतरमुड़ा और जोरापाली की पांच कॉलोनी परियोजनाओं से जुड़े कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किया गया है।
सभी संबंधितों को 22 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे आवश्यक दस्तावेज और जानकारी के साथ SDM कार्यालय, रायगढ़ में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
किन कॉलोनियों की हो रही जांच?
ग्राम खैरपुर में खसरा नंबर 606/1/1 सहित अन्य खसरों की कुल 7.259 हेक्टेयर भूमि पर कॉलोनी विकास के मामले में कमल अग्रवाल और रायगढ़ इस्पात एवं पॉवर प्रा.लि., देलारी रायगढ़ को नोटिस जारी किया गया है।
ग्राम पण्डरीपानी पूर्व में खसरा नंबर 15000/1/1 और 15000/2/1 की कुल 2.848 हेक्टेयर भूमि पर कॉलोनी विकास के मामले में कुन्तिमा पटेल, शिरिष कुमार डनसेना, राजेश पटेल, गौतम प्रसाद पटेल, राहुल रोहड़ा, प्रमोद कुमार अग्रवाल और दीपक सिंघल को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम बड़े अतरमुड़ा में खसरा नंबर 156/1/1 की 19,240 वर्गमीटर भूमि पर कॉलोनी विकास के संबंध में शांति देवी देवांगन और मनीष देवांगन को नोटिस दिया गया है। इसी ग्राम में खसरा नंबर 15000/2/1 की 84,038 वर्गमीटर भूमि पर कॉलोनी विकास के मामले में ओमप्रकाश और शुभम शुक्ल को भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं ग्राम जोरापाली में खसरा नंबर 15000/1 की 2.238 हेक्टेयर भूमि पर कॉलोनी विकास के मामले में राहुल रोहड़ा और नीरज अग्रवाल को नोटिस जारी किया गया है।
EWS भूमि और भूखंडों के नियमों की होगी जांच
SDM रायगढ़ महेश शर्मा के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय से जारी निर्देशों के बाद यह जांच शुरू की गई है। इसमें कॉलोनाइजरों द्वारा EWS वर्ग के लिए निर्धारित भूमि, निम्न आय वर्ग के लिए सुरक्षित भूखंडों और कॉलोनी विकास से जुड़े वैधानिक प्रावधानों के पालन की जांच की जा रही है।
प्रशासन ने संबंधित कॉलोनाइजरों से कॉलोनाइजर लाइसेंस, भूमि व्यपवर्तन आदेश, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से स्वीकृत ले-आउट और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विकास अनुज्ञा समेत कई दस्तावेज मांगे हैं।
15 प्रतिशत EWS भूमि के हस्तांतरण की भी जांच
एक एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली कॉलोनियों में EWS वर्ग के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत भूमि सक्षम प्राधिकारी को हस्तांतरित किए जाने से जुड़े दस्तावेजों की जांच होगी।
वहीं, एक एकड़ से कम क्षेत्रफल वाली कॉलोनियों में भूमि के मूल्य के बराबर राशि सक्षम प्राधिकारी और ग्राम पंचायत द्वारा संचालित संबंधित खाते में जमा किए जाने की रसीद भी प्रस्तुत करनी होगी।
इसके अलावा निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए सुरक्षित कम से कम 10 प्रतिशत भूखंडों के विक्रय की स्थिति भी जांच के दायरे में रहेगी।
बंधक भूखंड और विकास शुल्क का भी होगा सत्यापन
प्रशासन बंधक भूखंडों को बंधनमुक्त किए जाने संबंधी सक्षम अधिकारी के आदेश, कॉलोनी के आंतरिक विकास पर संभावित खर्च की 2 प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्क राशि ग्राम पंचायत निधि में जमा किए जाने की रसीद और बाह्य विकास के लिए निर्धारित 100 रुपये प्रति वर्गमीटर की राशि पंचायत कोष में जमा किए जाने संबंधी दस्तावेजों की भी जांच करेगा।
इसके साथ ही कॉलोनी विकास कार्य पूरा होने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी और ग्राम पंचायत को भेजी गई जानकारी की प्रति भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
दस्तावेज नहीं दिए तो होगी कार्रवाई
प्रशासन ने सभी संबंधित कॉलोनाइजरों को निर्धारित तारीख और समय पर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेज अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित समय पर दस्तावेज या जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कॉलोनाइजरों की होगी।