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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कारोबारी महेंद्र गोयनका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब 1000 करोड़ रुपए की संपत्तियों और कंपनियों के शेयरों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के मामले में उन्हें गिरफ्तार करने के लिए शनिवार को कोलकाता पुलिस की टीम रायपुर पहुंची। पुलिस ने शहर के आनंदम सिटी में उनके ठिकाने पर दबिश दी, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही कारोबारी परिवार सहित फरार हो गया। पुलिस टीम फिलहाल उसकी तलाश में जुटी है।
बताया जा रहा है कि कोलकाता हाईकोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए नया वारंट जारी हुआ था। इसी वारंट के आधार पर कोलकाता पुलिस रायपुर पहुंची थी। पुलिस की योजना आरोपियों को गिरफ्तार कर कोलकाता ले जाने और सक्षम अदालत में पेश करने की थी। इसके बाद मामले में पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग की जानी थी। हालांकि, आरोपी के नहीं मिलने से पुलिस की कार्रवाई फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी।
वकील अमरेंद्र दास के मुताबिक, कोलकाता पुलिस कारोबारी महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार करने आनंदम सिटी पहुंची थी। गोयनका और उनके परिवार के HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) के खिलाफ भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। कोलकाता के तीन से चार थानों में उनके खिलाफ शिकायतें और मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। उनके भाई और पत्नी पर भी कई कंपनियों में कथित धोखाधड़ी के आरोप हैं।
विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनी से भी करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश के कटनी से विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक की पारिवारिक कंपनी का नाम भी सामने आया है। वकील अमरेंद्र दास के अनुसार, महेंद्र गोयनका पर संजय पाठक की पारिवारिक कंपनी में भी करोड़ों रुपए की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप है। शनिवार को कोलकाता पुलिस जिस मामले में रायपुर पहुंची थी, वह कोलकाता के बउबाजार थाने में दर्ज है।
वकील का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई के बाद से गोयनका रायपुर में ही अलग-अलग जगहों पर छिप रहे हैं। उन्होंने शहर के स्थानीय कारोबारी घनश्याम अग्रवाल पर भी गोयनका को सहयोग देने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बताया गया है कि जुलाई में भी महेंद्र गोयनका 14 दिनों तक हिरासत में रहे थे।
कंपनियों के 5 हजार शेयरों पर कब्जे का आरोप
मामले की जड़ कंपनियों के शेयरों के कथित फर्जी हस्तांतरण से जुड़ी है। यह विवाद यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर कथित अवैध कब्जे का है। कोलकाता में दर्ज FIR के मुताबिक, महेंद्र गोयनका और उनके सहयोगियों पर जाली दस्तावेज, फर्जी हस्ताक्षर और कंपनियों की नकली मुहरों का इस्तेमाल कर शेयरों का मालिकाना हक बदलने की कोशिश करने का आरोप है।
शिकायत एडमिट विनट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर गोपाल कुमार यादव ने दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, उनकी कंपनी के पास व्यू टेक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के 5 हजार इक्विटी शेयर थे। इन शेयरों को उनकी कंपनी ने फ्यूचर डीलट्रेड प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि शेयर ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 4 फरवरी 2018 को ये 5 हजार शेयर एडमिट विनट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के नाम दर्ज कर दिए गए थे। इन शेयरों के मूल सर्टिफिकेट भी शिकायतकर्ता कंपनी के पास मौजूद थे।
पुराने रिकॉर्ड में बदलाव कर शेयर ट्रांसफर दिखाने का आरोप
FIR में आरोप लगाया गया है कि बाद में आरोपियों ने 6 जुलाई 2018 को हुई कथित बोर्ड मीटिंग के प्रस्ताव का सहारा लेकर वित्तीय वर्ष 2016-17 का संशोधित वार्षिक रिटर्न (MGT-7) दाखिल किया।
इस संशोधित रिकॉर्ड में दिखाया गया कि 9 मार्च 2017 को ही 5 हजार शेयर फ्यूचर डीलट्रेड प्राइवेट लिमिटेड से महेंद्र गोयनका एंड संस के नाम ट्रांसफर कर दिए गए थे।
शिकायतकर्ता कंपनी का दावा है कि उसने न तो इन शेयरों को बेचने की कोई सहमति दी थी और न ही इसके बदले कोई भुगतान प्राप्त किया था। शेयर ट्रांसफर से संबंधित किसी भी दस्तावेज पर कंपनी की ओर से हस्ताक्षर नहीं किए गए थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुराने रिकॉर्ड में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बदलाव कर शेयरों पर कब्जा करने की कोशिश की गई। इसे यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों पर नियंत्रण हासिल करने की कथित साजिश का हिस्सा बताया गया है।
30 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR, कई लोगों के नाम शामिल
कोलकाता के बउबाजार थाने में 30 अक्टूबर 2026 को इस मामले में FIR दर्ज की गई थी। इसमें महेंद्र गोयनका, अभिषेक अग्रवाल, अशोक रैकवार, मनीष गोयनका, सुरेंद्र सिंह सलूजा और धनेश शिवहरे के नाम शामिल हैं। इसके अलावा महेंद्र गोयनका एंड संस और सुशील गोयनका एंड संस को भी FIR में आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
गिरफ्तारी के बाद कोलकाता ले जाने की थी तैयारी
कोलकाता हाईकोर्ट से नया गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने रायपुर में कार्रवाई की योजना बनाई थी। शनिवार को टीम आनंदम सिटी पहुंची, लेकिन कारोबारी के परिवार सहित फरार होने के कारण गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
पुलिस अब महेंद्र गोयनका और अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। गिरफ्तारी होने पर उन्हें कोलकाता ले जाकर अदालत में पेश किया जाना है। इसके बाद पुलिस मामले में पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी।
फिलहाल इस पूरे मामले में कारोबारी महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन पर लगे आरोपों की जांच जारी है और मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।