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रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम के जोन-8 से जुड़ा विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। सफाई कर्मचारियों के भुगतान को लेकर जोन आयुक्त और कांग्रेस पार्षद संदीप साहू के बीच हुए कथित विवाद के बाद पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जोन-8 की जोन आयुक्त राजेश्वरी पटेल की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
भुगतान को लेकर फोन पर हुई बातचीत
शिकायत के मुताबिक, 11 अगस्त की सुबह करीब 11:50 बजे नगर निगम मुख्यालय के सभाकक्ष में विज्ञापन संबंधी प्रशिक्षण चल रहा था। इसी दौरान वीर सावरकर नगर वार्ड क्रमांक-7 के पार्षद संदीप साहू ने जोन आयुक्त राजेश्वरी पटेल को फोन किया। बातचीत का विषय वार्ड के सफाई ठेकेदार के कर्मचारियों के भुगतान से जुड़ा था।
जोन आयुक्त ने कथित तौर पर पार्षद को बताया कि सफाई कर्मचारियों का भुगतान उनकी वास्तविक उपस्थिति के आधार पर किया जाएगा। शिकायत में आरोप है कि पार्षद ने स्वीकृत 38 कर्मचारियों का प्रतिदिन भुगतान किए जाने की बात कही। भुगतान के तरीके को लेकर सहमति नहीं बनने के बाद बातचीत कथित रूप से विवाद में बदल गई।
गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप
जोन आयुक्त की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भुगतान के मुद्दे पर असहमति के बाद पार्षद ने फोन पर उनके साथ अभद्र और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में जान से मारने और देख लेने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपों की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में फोन पर हुई बातचीत, घटनाक्रम और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है।
पार्षद संदीप साहू ने आरोपों को बताया गलत
वहीं कांग्रेस पार्षद संदीप साहू ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि जोन-8 में कामकाज को लेकर पहले से शिकायतें सामने आती रही हैं। पार्षद ने आरोप लगाया कि जोन में बिना कमीशन काम नहीं होने की स्थिति है और कमीशन नहीं देने के कारण सफाई कर्मचारियों का भुगतान रोका गया।
संदीप साहू का कहना है कि उन्होंने सफाई कर्मचारियों के भुगतान का मुद्दा उठाया था और कर्मचारियों के हित में आवाज उठाने के कारण उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने जोन आयुक्त द्वारा लगाए गए गाली-गलौज और धमकी के आरोपों से इनकार किया है।
शिकायत से लेकर FIR तक ऐसे बढ़ा मामला
मामला मूल रूप से सफाई कर्मचारियों के भुगतान से जुड़ा था, लेकिन फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप ने इसे गंभीर रूप दे दिया। जोन आयुक्त की शिकायत पुलिस तक पहुंची और पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
इस मामले में एक ओर अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधि पर अभद्रता और धमकी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर पार्षद ने पूरे आरोपों को खारिज करते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।
निगम में पद-पावर को लेकर पहले भी विवाद
नगर निगम में पार्षदों और अधिकारियों के बीच अधिकार, कामकाज और प्रभाव को लेकर विवाद का यह पहला मामला नहीं है। खबर के अनुसार, मौजूदा नगर सरकार के कार्यकाल में पद और प्रभाव को लेकर कर्मचारियों-अधिकारियों से विवाद के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है।
फिलहाल संदीप साहू के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। दोनों पक्षों के दावों और आरोपों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने रायपुर नगर निगम के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।