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रायपुर। राजधानी रायपुर के सड्डू स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं के एक छात्र को टीसी दिए जाने का मामला सामने आया है। छात्र के परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चे पर तंत्र क्रिया और जादू-टोना से जुड़ी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए उसे हॉस्टल से बाहर कर दिया और टीसी दे दी। वहीं, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्र का व्यवहार सामान्य नहीं था और उसकी कुछ गतिविधियों से हॉस्टल में रहने वाले दूसरे बच्चे डर गए थे।
मामले की शिकायत छात्र के माता-पिता ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में की थी। शिकायत सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने छात्र की टीसी रद्द कर उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रयास विद्यालय के प्राचार्य और हॉस्टल अधीक्षक से पूरे मामले में जवाब तलब किया गया है।
3 सितंबर को हुआ था एडमिशन
परिजनों के मुताबिक, छात्र का एडमिशन 3 सितंबर 2026 को सड्डू स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में कराया गया था। परिवार का आरोप है कि एडमिशन के करीब दो सप्ताह बाद ही छात्र को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया और उसे टीसी थमा दी गई।
परिजनों का कहना है कि बच्चे पर तंत्र क्रिया से जुड़ी गतिविधियां करने जैसे आरोप लगाए गए। परिवार ने सवाल उठाया है कि यदि बच्चे के व्यवहार को लेकर कोई समस्या थी तो स्कूल प्रबंधन को पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए थी और उचित काउंसलिंग या अन्य शैक्षणिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी।
अंधेरे में बैठने और आकृतियां बनाने की बात
वहीं, स्कूल प्रबंधन ने छात्र को टीसी दिए जाने को लेकर अपना अलग पक्ष रखा है। हॉस्टल अधीक्षक आशीष पांडेय के मुताबिक, छात्र के व्यवहार को लेकर पहले उसकी काउंसलिंग कराई गई थी।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्र अक्सर अंधेरे में बैठता था और अपने कमरे में अलग-अलग तरह की आकृतियां बनाता था। उसकी इन गतिविधियों को देखकर हॉस्टल में रहने वाले कुछ अन्य बच्चे डर गए थे। प्रबंधन के अनुसार, बच्चों में डर की स्थिति बनने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया और छात्र की काउंसलिंग कराई गई।
स्कूल प्रबंधन का यह भी कहना है कि इस संबंध में छात्र के परिजनों को बुलाकर जानकारी दी गई थी। प्रबंधन के मुताबिक, छात्र को टीसी देने के लिए उसकी ओर से कोई दबाव नहीं बनाया गया था, बल्कि परिजनों ने स्वयं टीसी जारी करने के लिए लिखित आवेदन दिया था।
माता-पिता का आरोप- कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं दी
दूसरी ओर, छात्र के माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन के इस दावे पर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि बच्चे के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में आवेदन देकर मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि बच्चे की पढ़ाई अचानक रोक दिए जाने से उसकी शिक्षा प्रभावित हुई है।
बाल आयोग ने लिया संज्ञान
शिकायत और सामने आए तथ्यों के आधार पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने छात्र की टीसी रद्द करने और उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच और अंतिम निर्णय होने तक छात्र की पढ़ाई किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को पूरे मामले की जांच कर लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारी से फोन पर भी बात की और मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
21 सितंबर को प्राचार्य और अधीक्षक होंगे पेश
मामले की आगे की जांच के लिए प्रयास आवासीय विद्यालय के प्राचार्य और हॉस्टल अधीक्षक को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे बाल आयोग के कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
दोनों अधिकारियों को मामले से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा गया है। आयोग यह भी जांच करेगा कि छात्र पर लगाए गए आरोपों का आधार क्या था, टीसी देने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई और छात्र के माता-पिता को इसकी जानकारी कब और किस तरीके से दी गई।
अब जांच में सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि बच्चे पर जादू-टोना या तंत्र क्रिया से जुड़े आरोप लगाकर उसे स्कूल से बाहर किया गया, जबकि स्कूल प्रबंधन छात्र के व्यवहार और अन्य बच्चों के डरने को कार्रवाई की वजह बता रहा है।
बाल आयोग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छात्र को टीसी देने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं और उस पर लगाए गए आरोपों का वास्तविक आधार क्या था। फिलहाल आयोग ने छात्र की शिक्षा बहाल करने को प्राथमिकता दी है।