

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

ram mandir donation controversy pmo seeks report
नई दिल्ली: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दान-चढ़ावे और चंदे को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब देश के सबसे बड़े प्रशासनिक दफ्तर तक पहुंच गया है।प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट तलब की है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस पूरे घटनाक्रम की क्रोनोलॉजी (घटनाक्रम की रिपोर्ट) मांगी है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई थी।
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया था कि मंदिर के चढ़ावे में करीब 5 से 7 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। इसके तुरंत बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को लपका और सरकार व ट्रस्ट की चुप्पी को संदिग्ध करार दिया।
विवाद बढ़ने पर 9 जून को भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग की। मंदिर के पूर्व अकाउंट इंचार्ज महिपाल सिंह ने दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे में लंबे समय से गड़बड़ी चल रही थी। उन्होंने शीर्ष प्रबंधन से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पद से हटा दिया गया।
इस पूरे मामले पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा “राम मंदिर में शिला पूजन के समय से ही चोरी जारी है। जब निर्माण शुरू हुआ तो दो-दो मिनट में प्लॉट की कीमतें करोड़ों रुपये बढ़ गईं। वहां चंपत राय बैठे हैं... 'चंपत' का मतलब ही होता है 'लेकर भाग जाना'। आपको समझ जाना चाहिए।”
दूसरी तरफ, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। गोपाल राव (ट्रस्ट सदस्य) ने साफ कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) के पास हमेशा पुलिस और CISF के जवान तैनात रहते हैं। इससे पहले महासचिव चंपत राय ने भी स्पष्ट किया था कि एसबीआई (SBI) के अधिकारियों की मौजूदगी में मंदिर का आंतरिक (इंटरनल) ऑडिट होता है। इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी या गबन सामने नहीं आया है।
इस मामले के सामने आने के बाद सियासी और धार्मिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। महंत कमल नयन दास (उत्तराधिकारी, महंत नृत्य गोपाल दास) ने कहा"यदि दान में कोई गड़बड़ी हुई है तो निष्पक्ष जांच हो। इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच कौन करेगा? सब के सब बेईमान हैं। जो साइकिल से चलते थे, आज बड़ी-बड़ी गाड़ियों और मकानों में घूम रहे हैं।"
पीएमओ (PMO) द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस मामले को दबाया नहीं जा सकेगा। जहां एक तरफ विपक्ष पारदर्शिता और जांच की मांग पर अड़ा है, वहीं ट्रस्ट इसे छवि धूमिल करने की साजिश बता रहा है। अब देखना यह होगा कि ट्रस्ट द्वारा पीएमओ को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं।