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महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को CBI की टीम रायपुर लेकर पहुंच गई है। दिल्ली से फ्लाइट E6 2307 के जरिए उसे रायपुर लाया गया। एयरपोर्ट पर उसकी मौजूदगी की भनक लगते ही मीडियाकर्मी भी पहुंच गए। पहले उसे एयरपोर्ट के गेट नंबर-2 से बाहर निकालने की तैयारी थी, लेकिन मीडिया की मौजूदगी के चलते रणनीति बदल दी गई। इसके बाद उसे गेट नंबर-1 से बाहर निकालकर गाड़ी में बैठाया गया। इस दौरान कुछ देर के लिए एयरपोर्ट की लाइट भी बंद हो गई थी।
सौरभ चंद्राकर पर करीब 6 हजार करोड़ रुपए के ऑनलाइन सट्टा घोटाले में शामिल होने का आरोप है। उसे ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। अब उसकी रायपुर में पेशी को लेकर हलचल तेज हो गई है।
दिल्ली कोर्ट ने दी दो दिन की ट्रांजिट रिमांड
सोमवार को सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने सुनवाई के बाद उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंपने का आदेश दिया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाए। हालांकि, सुनवाई के दौरान सौरभ के वकील ने प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर CBI की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
प्रत्यर्पण की शर्तों पर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
सौरभ चंद्राकर के वकील ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए दलील दी कि भारत की ओर से प्रत्यर्पण के लिए भेजे गए अनुरोध में ED के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि CBI के मामले को मंजूरी नहीं दी गई थी।
बचाव पक्ष का कहना था कि प्रत्यर्पण की शर्तों के मुताबिक सौरभ के खिलाफ उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। ऐसे में CBI उसे अपने मामले में रिमांड पर नहीं ले सकती।
वहीं, CBI ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत पहले ही ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। ED और CBI के मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। एजेंसी के मुताबिक, प्रत्यर्पण की शर्तों और मुकदमा चलाने के अधिकार से जुड़े सवालों पर रायपुर की विशेष अदालत फैसला करेगी।
CM साय बोले- प्रोटेक्शन मनी का होगा बड़ा खुलासा
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा होगा।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब सौरभ से पूछताछ और कथित लेन-देन के नेटवर्क को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
दीपक बैज बोले- कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई थी कार्रवाई
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ कार्रवाई कांग्रेस सरकार के समय ही शुरू हो गई थी। उस दौरान 70 से अधिक FIR दर्ज की गई थीं। कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं और ऑनलाइन सट्टा ऐप पर कार्रवाई के लिए कानून भी बनाए गए थे।
2022 की FIR से जुड़ा है पूरा मामला
CBI के मुताबिक, महादेव बुक ऐप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रमोट किया था। आरोप है कि ऑनलाइन सट्टा संचालित करने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और पैनल तैयार किए गए थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि सट्टे से मिलने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इकट्ठा की जाती थी और फिर उसे UAE तक पहुंचाया जाता था। सौरभ और उसके सहयोगियों पर दुबई से इस नेटवर्क को संचालित करने का भी आरोप है।
जांच में छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को इस नेटवर्क में कर्मचारी और मैनेजर के तौर पर काम पर रखने की बात भी सामने आई है।
ED और CBI दोनों कर रही हैं जांच
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से जुड़ी 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।
अब आगे क्या होगा?
सौरभ चंद्राकर को 4 नवंबर को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। यहां उसकी रिमांड और प्रत्यर्पण की शर्तों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे की कार्रवाई होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सौरभ से पूछताछ में सट्टे के नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और कथित प्रोटेक्शन मनी को लेकर क्या जानकारी सामने आती है? क्या इस मामले में उन लोगों के नाम भी सामने आएंगे, जिन तक सट्टे की कमाई पहुंचने का आरोप है? अब सबकी नजर रायपुर की विशेष अदालत और CBI की आगे की जांच पर टिकी है।