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नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन घटनाक्रमों को राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, उद्धव गुट के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अलग समूह के रूप में मान्यता देने और शिंदे की शिवसेना में शामिल होने का पत्र सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि सांसदों के हस्ताक्षरों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और अगले कुछ दिनों में इस पर औपचारिक फैसला हो सकता है।
पार्टी बैठक से दूरी ने बढ़ाई अटकलें
गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन पार्टी के छह बागी सांसद इसमें शामिल नहीं हुए। बैठक में लोकसभा में पार्टी के केवल तीन सदस्य और राज्यसभा के एकमात्र सांसद संजय राउत ही मौजूद रहे। छह सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी में संभावित विभाजन की अटकलों को और बल दे दिया।
बागी सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भास्करराव वाकचौरे के नाम चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही शिंदे गुट के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं।
दिल्ली में गुप्त बैठकों का दौर
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में बागी सांसदों की लगातार बैठकें हो रही हैं। इनमें से कुछ सांसद 13 जून को केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेताओं से मिले थे। इसके बाद 16 जून को वे अलग-अलग शहरों से दिल्ली पहुंचे और 17 जून की सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। इसी दौरान अलग समूह बनाने और शिंदे गुट में विलय की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि 19 जून को भी कुछ सांसद दिल्ली में मौजूद थे और उन्होंने पार्टी से अलग होने की रणनीति पर अंतिम रूप देने के लिए बैठकें कीं।
उद्धव गुट की कार्रवाई
शिवसेना (यूबीटी) ने बैठक में अनुपस्थित रहने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी ने उनसे सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, बागी सांसदों को भरोसा है कि उनके पास आवश्यक संख्या होने के कारण दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर तत्काल कोई खतरा नहीं है।
संजय राउत का तीखा हमला
घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बागी सांसदों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें “गद्दार”, “बेईमान” और “धोखेबाज” तक करार दिया। राउत ने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, उन्हें जनता और कार्यकर्ताओं के सवालों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नेताओं को राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
‘ऑपरेशन टाइगर’ से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
महाराष्ट्र में पहले ही शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में टूट के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। अब यदि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हो जाते हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका माना जाएगा। साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत और बढ़ेगी तथा महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता संतुलन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला साबित हो सकता है।