

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

south-bastar-47-naxalites-surrender-last-commander-chhattisgarh
छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। वर्षों से सक्रिय नक्सली संगठन को उस समय करारा झटका लगा, जब उसके आखिरी बड़े कमांडर समेत 47 नक्सलियों ने तेलंगाना में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर करीब 1.50 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इस आत्मसमर्पण के साथ ही दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की एक पूरी बटालियन के समाप्त होने की बात कही जा रही है।
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नक्सली शामिल हैं जो लंबे समय से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में हिंसक वारदातों में शामिल रहे थे। इनमें संगठन का प्रमुख कमांडर विज्जा भी शामिल बताया जा रहा है, जो अपने 46 साथियों के साथ हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने सुरक्षा एजेंसियों को 32 अत्याधुनिक हथियार, जिनमें एसएलआर, एके-47, इंसास राइफल और पिस्टल शामिल हैं, सौंपे हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण सिर्फ संख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। दक्षिण बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का मजबूत प्रभाव माना जाता था, वहां अब उनका नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। इस वर्ष अब तक 260 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और सुरक्षा बलों ने 238 हथियार बरामद किए हैं। यह संकेत है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार बढ़ते सुरक्षा दबाव का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
बताया जा रहा है कि केंद्र और राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति ने भी नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया है। नई व्यवस्था के तहत अब नक्सली सिर्फ कलेक्टर के सामने ही नहीं, बल्कि एसडीएम और एडीओपी स्तर के अधिकारियों के सामने भी आत्मसमर्पण कर सकेंगे। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना और जंगलों में सक्रिय नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देना है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, आवास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की आखिरी सक्रिय बटालियन के कमजोर पड़ने से आने वाले समय में हिंसा की घटनाओं में भारी कमी आ सकती है। लगातार हो रही मुठभेड़ों, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण के कारण नक्सली संगठन अब अंदर से टूटता नजर आ रहा है। सुरक्षा बलों ने इसे बस्तर में शांति की दिशा में ऐतिहासिक मोड़ बताया है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले महीनों में और भी कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना है, क्योंकि संगठन के भीतर मनोबल तेजी से गिरा है।