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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दुर्गम इलाकों में ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ एक बार फिर जीवन रक्षक साबित हुआ है। घने जंगलों, नदी-नालों और कठिन रास्तों को पार कर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो मासूम बच्चियों की जान बचाई। 5 वर्षीय माड़वी नन्दे और 4 वर्षीय माड़वी सुमड़ी गंभीर मलेरिया, कुपोषण और बेहद कम हीमोग्लोबिन से जूझ रही थीं। समय पर इलाज मिलने से अब दोनों बच्चियां स्वस्थ होकर अपने गांव लौट चुकी हैं।
जानकारी के अनुसार, सुकमा जिले के दूरस्थ ग्राम दुरभा में स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची थी। वहां दोनों बच्चियों की हालत बेहद गंभीर मिली। उनके शरीर में हीमोग्लोबिन मात्र 2 से 3 ग्राम तक रह गया था। स्थिति को देखते हुए टीम ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने का फैसला लिया। स्वास्थ्य कर्मियों ने दुर्गम रास्तों पर पैदल सफर कर बच्चियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया, जहां से एम्बुलेंस के जरिए करीब 96 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल सुकमा ले जाया गया।

जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने युद्ध स्तर पर इलाज शुरू किया। बच्चियों को खून चढ़ाया गया, मलेरिया का पूरा उपचार दिया गया और पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में विशेष देखभाल की गई। कुछ दिनों के इलाज के बाद दोनों का हीमोग्लोबिन स्तर 9 ग्राम से अधिक पहुंच गया और उनकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ। इस दौरान परिजनों को पोषण, स्वच्छता और बच्चों के मानसिक विकास को लेकर भी जागरूक किया गया।
इलाज के बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके गांव वापस पहुंचाया गया। प्रशासन की ओर से बच्चों को शासन की अन्य योजनाओं से जोड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज भी तैयार किए गए हैं। गांव लौटने के बाद बच्चियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान स्वास्थ्य विभाग की मेहनत और संवेदनशीलता की कहानी बयां कर रही है।

स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में अब तक 1,74,770 लोगों की स्वास्थ्य जांच और उपचार किया जा चुका है। जिले में कुल 2,93,386 लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के दौरान 5,240 से अधिक मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, एनीमिया, उच्च जोखिम गर्भावस्था, कुपोषण, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों के लक्षण मिलने पर बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।