

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

sukma young officers ground level development roadmap tribal areas
सुकमा। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में प्रशासन की कार्यशैली इन दिनों एक अलग तस्वीर पेश कर रही है। जिले के युवा अफसर ग्रामीणों के बीच पहुंचकर न केवल उनकी समस्याएं सुन रहे हैं, बल्कि जमीन पर बैठकर ग्रामीणों के साथ चर्चा करते हुए विकास का रोडमैप तैयार कर रहे हैं।
सुकमा कलेक्टर IAS अमित कुमार, एसपी IPS मयंक गुर्जर, जिला पंचायत सीईओ IAS मुकुंद ठाकुर और डीएफओ IFS अक्षय भोंसले की ग्रामीणों के साथ हुई ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में चारों अधिकारी ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर आदिवासी समुदाय की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों के बीच पहुंचकर समझ रहे जमीनी जरूरतें
सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाना है। ऐसे में जिले के प्रशासनिक अधिकारियों का ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सीधे सुनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन बैठकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को समझने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की योजनाओं पर चर्चा की जा रही है।
AC कमरों की बजाय गांवों में तैयार हो रहा विकास का प्लान
अक्सर विकास योजनाओं को लेकर होने वाली बैठकों की तस्वीरें दफ्तरों और वातानुकूलित कमरों तक सीमित रहती हैं, लेकिन सुकमा में प्रशासनिक नेतृत्व की यह तस्वीर अलग संदेश देती है। जिले के युवा अफसर ग्रामीणों के बीच बैठकर उन्हीं से उनकी समस्याएं और जरूरतें समझ रहे हैं।
खास तौर पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों तक प्रशासन की पहुंच बढ़ाने और उन्हें शासन की मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में इस तरह का जमीनी संवाद अहम माना जा रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
प्रशासन की इस पहल से उम्मीद है कि सुकमा के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क, पेयजल और अन्य जरूरी सेवाएं पहुंचाने की दिशा में काम को गति मिलेगी।
युवा अधिकारियों की इस जमीनी पहल को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक संदेश भी जा रहा है। ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी बात सुनने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए मौके पर ही योजना बनाने की कोशिश प्रशासन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है।
सुकमा के इन युवा अधिकारियों का यह प्रयास बताता है कि विकास का असली रोडमैप सिर्फ फाइलों और दफ्तरों में नहीं, बल्कि गांव की जमीन पर ग्रामीणों के साथ बैठकर भी तैयार किया जा सकता है।