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देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में जजों की कमी को दूर करने और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर अब 38 कर दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस संबंध में अध्यादेश जारी किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने भी अपनी आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है।
अध्यादेश के बाद मानसून सत्र में बनेगा कानून
विगत 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में चार न्यायाधीशों के पद बढ़ाने के लिए 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2026' को मंजूरी दी थी। रविवार को राष्ट्रपति की मुहर और केंद्र की अधिसूचना के बाद इसे लागू कर दिया गया है। अब संसद के आगामी मानसून सत्र में इस अध्यादेश को पारित कराकर इसे नियमित कानून में बदला जाएगा।
1956 के मूल अधिनियम में हुआ संशोधन
इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा 2 में संशोधन किया गया है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस (CJI) को मिलाकर कुल 34 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जो अब बढ़कर 38 हो जाएंगे।
95 हजार लंबित मामलों के कारण फैसला जरूरी
सुप्रीम कोर्ट में इस समय करीब 95 हजार मामले लंबित (Pending Cases) हैं। मामलों के जल्द निपटारे और न्याय को गति देने के उद्देश्य से यह फैसला लंबे समय से अपेक्षित था।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या का इतिहास:
1950 (स्थापना के समय): CJI सहित कुल 8 न्यायाधीश थे।
1956 (पहली बार बढ़ोतरी): संख्या बढ़ाकर 10 की गई (CJI अलग)।
1960: जजों की संख्या बढ़कर 13 हुई।
1977: जजों की संख्या बढ़कर 17 हुई।
1986: चीफ जस्टिस को छोड़कर संख्या 25 की गई।
2026 (वर्तमान स्थिति): अब बढ़कर कुल 38 जज होंगे।
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