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नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने बिहार के एक अजीबोगरीब मामले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। भ्रष्टाचार के एक मामले में साक्ष्य (Evidence) के तौर पर जब्त की गई 10,000 रुपये की नकदी को चूहों द्वारा कुतर दिए जाने के दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना न्याय व्यवस्था और मालखाने के रख-रखाव की गंभीर खामियों को उजागर करती है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2014 का है, जब बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी के पद पर तैनात एक महिला को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी, तभी यह बात सामने आई कि जब्त की गई नकदी अब अस्तित्व में नहीं है क्योंकि उसे चूहों ने नष्ट कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे पर गहरा संदेह जताया और कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य को सुरक्षित रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि जरूरी सबूत ही 'चूहों का भोजन' बन जाएंगे, तो जवाबदेही कैसे तय होगी? अदालत ने इसे राज्य के लिए भारी राजस्व नुकसान करार दिया।
कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह मानना कठिन है कि चूहों ने पूरी नकदी नष्ट कर दी। अब इस बात की विस्तृत जांच की जाएगी कि संपत्ति की सुरक्षा में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
"जरूरी साक्ष्य चूहों की खुराक नहीं बन सकते। यदि न्याय के लिए साक्ष्य ही सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सार्वजनिक धन की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।" - सुप्रीम कोर्ट