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सुकमा। कभी नक्सली हिंसा और भय का पर्याय रहा ताड़मेटला गांव अब बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है। आजादी के बाद पहली बार इस सुदूर गांव में कलेक्टर के पहुंचने से ग्रामीणों में उम्मीद की नई किरण जगी है। यह दौरा केवल प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि विश्वास बहाली और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
कलेक्टर अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने घने जंगलों और कठिन पगडंडियों को पार कर गांव का दौरा किया। उनके साथ डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह पुरोहित और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर भी मौजूद रहे। अधिकारियों की टीम ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।

इस दौरान प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी भवन और पंचायत भवन के निर्माण के लिए 45 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। साथ ही 15 लाख रुपये की अग्रिम राशि पंचायत खाते में ट्रांसफर कर दी गई, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। पेयजल समस्या के समाधान के लिए भी प्रशासन ने ठोस आश्वासन दिया है और एक सप्ताह के भीतर हर घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीणों से प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा पेंशन, महतारी वंदन योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पहली बार ग्रामीणों ने महसूस किया कि प्रशासन खुद उनके बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुन रहा है।
गौरतलब है कि ताड़मेटला वही गांव है, जहां वर्ष 2010 में नक्सली हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रशासन का यह दौरा नक्सल उन्मूलन और विकास की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
राज्य सरकार के सुशासन और विकास के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए कलेक्टर अमित कुमार ने ग्रामीणों से कहा कि अब गांव का विकास उनके अपने हाथों में है और प्रशासन हर कदम पर उनके साथ खड़ा है।