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नई दिल्ली। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR (Merchant Discount Rate) लगाए जाने की खबरों के बीच विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम अमेरिका के दबाव में उठाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने UPI शुल्क को लेकर सरकार की नीति और फैसले पर सवाल उठाए।
विपक्ष का कहना है कि सरकार लंबे समय से देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देती रही है। ऐसे में UPI से जुड़े कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाए जाने की व्यवस्था को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों पर संभावित असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
AAP सांसद संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उनका तर्क है कि अगर किसी ट्रांजैक्शन पर व्यापारी का खर्च बढ़ता है, तो उसका असर आगे चलकर ग्राहकों पर पड़ सकता है।
आम UPI यूजर के लिए क्या मतलब?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 0.4 फीसदी MDR की बात चुनिंदा मर्चेंट UPI पेमेंट को लेकर है। इसे आम लोगों के हर UPI ट्रांजैक्शन पर सीधे तौर पर लगने वाला शुल्क नहीं माना जाना चाहिए।
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट के प्रोसेसिंग से जुड़े पक्षों के बीच लिया जाता है। इसलिए किसी मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अलग से 0.4 फीसदी भुगतान करना होगा।
BJP ने विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रम फैलाने वाला
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने UPI चार्ज को लेकर विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। BJP का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रहा है।
ऐसे में फिलहाल राजनीतिक बहस का केंद्र यह है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था का दायरा क्या होगा, किन मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर यह लागू होगी और इसका आर्थिक असर किस पर पड़ेगा।
UPI चार्ज पर क्यों बढ़ी सियासत?
UPI भारत में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी शुल्क या नियम में बदलाव का असर व्यापारियों, पेमेंट कंपनियों और डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों पर चर्चा का विषय बन जाता है।
विपक्ष जहां इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं BJP विपक्ष के आरोपों को भ्रम फैलाने वाला बता रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित व्यवस्था का आधिकारिक स्वरूप क्या होगा और सरकार इस पर आगे क्या स्पष्टीकरण देती है।
फिलहाल UPI को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में डिजिटल पेमेंट, व्यापारियों की लागत और ग्राहकों पर संभावित असर को लेकर बड़ी बहस का रूप ले सकता है।