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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया का रणनीतिक समुद्री क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी इन दिनों वैश्विक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच पिछले 72 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़े तीन जहाज समुद्री सुरक्षा घटनाओं का शिकार हुए हैं। इनमें एक घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों भारतीय अब भी इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में तैनात हैं।
तीन दिनों में तीन बड़े घटनाक्रम
पहली घटना 8 जून को ओमान के दक्षिण-पूर्वी तट के पास सामने आई। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान 'MT Marivex' नामक टैंकर को निशाना बनाया गया। जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। घटना में किसी भारतीय की जान नहीं गई, लेकिन जहाज के इंजन और संचालन प्रणाली को नुकसान पहुंचा तथा उसमें आग लग गई।
इसके बाद 9 और 10 जून की दरमियानी रात 'MT Settebello' नामक ऑयल टैंकर समुद्री कार्रवाई की चपेट में आ गया। जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। इनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि बाद में की गई। इस घटना ने भारत सरकार और समुद्री क्षेत्र से जुड़े परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
तीसरी घटना 11 जून को सामने आई, जब 'MT Jalveer' नामक जहाज ओमान के निकट संकट में फंस गया। जहाज पर 21 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। राहत की बात यह रही कि सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बढ़ा खतरा
विदेश मंत्रालय के अनुसार इन घटनाओं में शामिल सभी जहाज विदेशी झंडे वाले थे और भारतीय स्वामित्व के नहीं थे। हालांकि जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत थे। मंत्रालय ने क्षेत्र में लगातार बढ़ती समुद्री असुरक्षा को गंभीर चिंता का विषय बताया है।
शिपिंग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस समय होर्मुज क्षेत्र और उसके आसपास करीब 18 हजार भारतीय नाविक विभिन्न विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत हैं। इसके अलावा भारतीय ध्वज वाले 13 जहाजों पर 562 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें 329 नाविक होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में और बाकी पूर्वी हिस्से में तैनात हैं।
अमेरिका ने दी कार्रवाई की वजह
अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने दावा किया है कि संबंधित जहाज ईरानी बंदरगाहों से जुड़े तेल परिवहन गतिविधियों में शामिल थे और कई बार चेतावनी देने के बावजूद निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि सुरक्षा और नाकेबंदी नियमों के उल्लंघन के कारण कार्रवाई की गई।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अप्रैल से लागू समुद्री नाकेबंदी के दौरान कई जहाजों को रोका गया है तथा बड़ी संख्या में जहाजों का मार्ग बदला गया है। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू की जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण यह समुद्री मार्ग अब अत्यधिक संवेदनशील बन चुका है। ड्रोन, मिसाइल और नौसैनिक गश्त की बढ़ती गतिविधियों ने व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल के लिए जोखिम बढ़ा दिया है।
भारत ने जताई चिंता
भारत के विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रही घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। सरकार भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर न केवल वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा, बल्कि खाड़ी देशों में कार्यरत हजारों भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की सुरक्षा भी गंभीर चुनौती बन सकती है।
फिलहाल होर्मुज और ओमान की खाड़ी का समुद्री क्षेत्र भारतीय नाविकों के लिए सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल हो गया है, जहां हर नई घटना के साथ चिंता और अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।