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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में मंगलवार से प्रस्तावित वार्ता को लेकर सोमवार देर रात तक असमंजस की स्थिति बनी रही, हालांकि देर शाम कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए। ईरान ने बातचीत में शामिल होने को लेकर अपना रुख पहले की तुलना में थोड़ा नरम किया है, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी अब भी वार्ता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
रॉयटर्स के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान पाकिस्तान में होने वाली इस वार्ता में शामिल होने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी को हटाया जाए ताकि वार्ता का माहौल तैयार हो सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि किसी भी समझौते से पहले होर्मुज क्षेत्र में नाकेबंदी जारी रहेगी। इससे बातचीत की संभावना पर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसी बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही। पहले खबर आई थी कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका में ही हैं, जबकि ट्रंप ने दावा किया था कि वह इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके हैं। बाद में ट्रंप ने कहा कि वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी टीम पाकिस्तान के लिए रवाना हो रही है और मंगलवार रात तक इस्लामाबाद पहुंच जाएगी।
ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ के वार्ता में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका के रवैये को लेकर तेहरान के भीतर गहरा ऐतिहासिक अविश्वास बना हुआ है। वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बातचीत में कहा कि ईरान आगे का फैसला वार्ता के दौरान अमेरिकी व्यवहार को देखकर करेगा।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब रविवार देर रात अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज से गुजर रहे ईरान के एक मालवाहक जहाज को रोक लिया। इसके बाद ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वाशिंगटन खुद शांति वार्ता को लेकर गंभीर नहीं है और दबाव की राजनीति कर रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता में ठोस प्रगति होती है तो वह ईरान के शीर्ष नेतृत्व से सीधे मिलने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए समझौते की शर्तें आसान हैं, उसे केवल परमाणु हथियारों की दिशा छोड़नी होगी।
वहीं ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने दो टूक कहा कि अमेरिका के विरोधाभासी और गैर-रचनात्मक संकेत यह संदेश देते हैं कि वह बातचीत नहीं, बल्कि ईरान से समर्पण चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है, जहां यह तय हो सकता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा या टकराव और गहरा जाएगा।