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वॉशिंगटन/जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 107 दिनों से चल रहा सैन्य तनाव और युद्ध आखिरकार सोमवार को एक बड़े समझौते के बाद समाप्त हो गया। इस डील को दोनों देशों ने डिजिटल रूप से साइन किया, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Qalibaf शामिल रहे।
इस समझौते का औपचारिक कार्यक्रम 19 जून को जिनेवा में आयोजित किया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा फैसला: बिना टोल खुलेगा समुद्री रास्ता
डील के तहत सबसे अहम फैसला होर्मुज स्ट्रेट को लेकर लिया गया है। अमेरिका का दावा है कि अब इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल या अवरोध नहीं लिया जाएगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाएगा।
ट्रम्प ने बयान में कहा कि अब वैश्विक जहाज अपने संचालन सामान्य तरीके से शुरू कर सकते हैं और तेल व्यापार बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगा।
ईरान की शर्तें: पहले भरोसा, फिर आगे का फैसला
ईरान की ओर से सुप्रीम लीडर के सलाहकार और उपविदेश मंत्री काज़िम घारीबाबदी ने डील की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान अमेरिका की नीयत को परखेगा, उसके बाद ही होर्मुज पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इजराइल ने जताई आपत्ति, क्षेत्रीय तनाव बरकरार
इस समझौते पर इजराइल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजराइली मंत्री बेन ग्विर ने कहा कि इजराइल इस डील का हिस्सा नहीं है और इसे मानने के लिए बाध्य भी नहीं है।
इसके साथ ही इजराइल ने सोमवार को लेबनान में हमले भी किए, जिससे क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
युद्ध का भारी आर्थिक असर: अमेरिका पर 10 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी से अब तक चले इस संघर्ष में अमेरिका को करीब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का खर्च उठाना पड़ा है।
डील के 14 प्रमुख बिंदु
इस समझौते में कुल 14 अहम प्रावधान शामिल हैं:
1. ईरान और अन्य मोर्चों पर युद्ध समाप्त
2. अमेरिका ईरान की संप्रभुता में दखल नहीं देगा
3. 30 दिनों में अमेरिकी नाकाबंदी समाप्त
4. ईरान से अमेरिकी सेनाएं हटाई जाएंगी
5. होर्मुज स्ट्रेट 30 दिनों में पूरी तरह खोला जाएगा
6. ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल पर प्रतिबंध हटेंगे
7. ईरान को निर्यात का पूरा अधिकार मिलेगा
8. पुनर्निर्माण के लिए 28 लाख करोड़ रुपये का पैकेज
9. परमाणु मुद्दे पर 60 दिन की वार्ता अवधि
10. ईरान परमाणु हथियार न बनाने का लिखित आश्वासन देगा
11. वार्ता के दौरान नए प्रतिबंध नहीं लगेंगे
12. 1.25 लाख करोड़ रुपये की ईरानी संपत्ति डीफ्रीज
13. क्रियान्वयन समिति का गठन
14. अंतिम समझौते की घोषणा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा
प्रमुख विवादित मुद्दे अभी भी कायम
समझौते के बावजूद कई मुद्दे अनसुलझे हैं:
इजराइल की भूमिका और विरोध
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम स्टॉक
होर्मुज पर सर्विस टैक्स का विवाद
पुनर्निर्माण पैकेज पर खाड़ी देशों की असहमति
विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश इस बड़े आर्थिक पैकेज पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं।
भारत पर असर: तेल और एलपीजी आपूर्ति को राहत
इस समझौते का सबसे बड़ा असर भारत पर भी पड़ेगा, क्योंकि भारत की लगभग 55% तेल और 90% एलपीजी आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है।
डील के बाद पहला गैस टैंकर ‘दिशा’ इस मार्ग से होकर भारत की ओर रवाना हुआ है।
इसके अलावा:
खाड़ी देशों में 90 लाख भारतीय काम करते हैं
भारत को 55 अरब डॉलर रेमिटेंस खाड़ी से मिलता है
भारत का कृषि और खाद्य निर्यात 11.8 अरब डॉलर है
इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पीएम मोदी का बयान: शांति और स्थिरता का स्वागत
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा था।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री व्यापार सामान्य होगा तथा आगे चलकर एक स्थायी समझौता संभव हो सकेगा।