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मध्य पूर्व में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। एक महीने तक चली बेनतीजा जंग के बाद अमेरिका अब ईरान के खिलाफ जमीनी सैन्य कार्रवाई (ग्राउंड ऑपरेशन) की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन इस ऑपरेशन की योजना बना रहा है, जो कई हफ्तों तक चल सकता है।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था, जिसके बाद यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में फैल गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र में उसके सहयोगियों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का सबसे अहम केंद्र बन गया है। यह दुनिया का प्रमुख समुद्री ऊर्जा मार्ग है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। युद्ध के बाद यहां से 90% तक जहाजों की आवाजाही कम हो गई है। वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। इस स्थिति ने डोनाल्ड ट्रंप पर भारी दबाव बना दिया है कि वह इस मार्ग को फिर से खोलें।
हवाई हमलों से अपेक्षित परिणाम न मिलने के बाद अब अमेरिका जमीनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूर्ण युद्ध नहीं बल्कि सीमित लेकिन रणनीतिक ऑपरेशन होगा।
संभावित योजना में शामिल हो सकते हैं:
खर्ग द्वीप पर कब्जा
होर्मुज के आसपास तटीय इलाकों में छापेमारी
जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियारों को नष्ट करना
स्पेशल फोर्स और नियमित सेना की संयुक्त कार्रवाई
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी नेतृत्व इस योजना को अंतिम मंजूरी देगा या नहीं। अगर मंजूरी मिलती है, तो ऑपरेशन कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक चल सकता है।
इसी बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर “Welcome to Hell” शीर्षक के साथ संदेश दिया है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर उतरते हैं, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जमीनी युद्ध शुरू होता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और सामरिक संतुलन पर पड़ेगा। खासकर ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है या कूटनीति के जरिए कोई समाधान निकलता है।