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west bengal public safety bill passed rioters 12 months jail without trial
कोलकाता: उत्तर प्रदेश और गुजरात की तर्ज पर पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को एक कड़ा कानून पास कर दिया है। राज्य में संगठित अपराध, दंगों और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए 'पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026' को भारी मतों से पारित किया गया। इस विधेयक के पक्ष में 176 मत पड़े, जबकि विरोध में केवल 41 मत आए। मतदान के दौरान 20 विधायक अनुपस्थित रहे।
12 महीने तक एहतियातन हिरासत और गैर-जमानती अपराध
इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य में दंगों और हिंसा की रोकथाम करना है। कानून के सख्त प्रावधानों के तहत:
असामाजिक गतिविधियों में लिप्त संदिग्धों को बिना किसी मुकदमे के 12 महीने तक एहतियातन हिरासत (Preventive Detention) में रखा जा सकेगा।
इस कानून के तहत दर्ज किए जाने वाले सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होंगे।
पुलिस के पास यह अधिकार होगा कि वह बिना वारंट के आरोपियों को गिरफ्तार कर सकेगी, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी।
प्रशासन को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की तलाशी लेने, उसके दस्तावेज और संपत्ति जब्त करने और अपराध से जुड़ी चल-अचल संपत्ति को कुर्क करने का पूरा अधिकार होगा।
चल और अचल संपत्ति होगी जब्त, वसूला जाएगा मुआवजा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सदन में कहा कि पिछली सरकारों के दौरान दंगाइयों ने सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने साफ किया कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा, लेकिन सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से सख्ती से मुआवजा वसूला जाएगा और उनकी चल व अचल संपत्ति भी जब्त की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और झारखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी ऐसे कड़े कानून लागू हैं।
हिरासत में लिए गए व्यक्ति के अधिकार
इस विधेयक में आरोपी के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है:
हिरासत में लिए गए व्यक्ति को निर्धारित समय के भीतर उसकी गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराया जाएगा।
उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। हालांकि, यदि सरकार को लगता है कि किसी जानकारी का खुलासा करना जनहित के खिलाफ है, तो वह उसे साझा नहीं करेगी।
यदि कोई आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो जाता है, तो अदालत के जरिए उद्घोषणा जारी कर उसकी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।