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Deliberations on expanding Lok Sabha seats; preparations for a new constitutional amendment to implement women's reservation.
नई दिल्ली। केंद्र सरकार लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण और महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है। चर्चा है कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित न हो। इसके साथ ही महिला आरक्षण को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के उद्देश्य से नए संविधान संशोधन विधेयक का मसौदा भी तैयार किया जा रहा है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण भारत के राज्यों की उस चिंता को दूर करना है, जिसमें उनका मानना है कि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। इसी कारण नए मसौदे में ऐसा फॉर्मूला तैयार करने पर विचार हो रहा है, जिससे राज्यों के बीच मौजूदा प्रतिनिधित्व का संतुलन बना रहे।सूत्रों के अनुसार, नए प्रस्ताव में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के वर्तमान अनुपात को बरकरार रखने का विकल्प भी शामिल है।
मौजूदा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो सकता है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार यह व्यवस्था 2034 से पहले लागू होना संभव नहीं है।सरकार अब इस कानून में संशोधन कर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए संविधान संशोधन विधेयक का नया प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है। इसी तर्ज पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों का विस्तार किया जाएगा, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।प्रस्ताव में यह भी व्यवस्था होगी कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में चरणबद्ध और रोटेशन प्रणाली के आधार पर किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, नई जनगणना के अंतिम आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार फिलहाल राजनीतिक समर्थन जुटाने पर भी ध्यान दे रही है। संविधान संशोधन पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास लोकसभा में लगभग 300 सांसद हैं, जबकि संशोधन पारित कराने के लिए करीब 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। ऐसे में सरकार पर्याप्त संख्याबल सुनिश्चित होने के बाद ही विधेयक संसद में पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है।