

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

women-reservation-bill-fails-lok-sabha-saroj-pandey-protest-durg
महिला आरक्षण अधिनियम से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 को लोकसभा में आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं किया जा सका। इस विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर भी सदन में विस्तृत चर्चा हुई। हालांकि लंबे विमर्श के बाद जब संविधान संशोधन विधेयक को मतदान के लिए रखा गया तो सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया।
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने सदन में मतदान के बाद बताया कि संशोधन पर विचार के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ कुल सदस्य संख्या के बहुमत की आवश्यकता होती है। आवश्यक आंकड़ा पूरा नहीं होने के कारण 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका।
दुर्ग में भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं होने के विरोध में दुर्ग शहर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर के गांधी पुतला चौक पर भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष Saroj Pandey के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता और पार्टी पदाधिकारी एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाले दलों की आलोचना की।
सरोज पांडेय ने विपक्ष पर साधा निशाना
विरोध प्रदर्शन के दौरान सरोज पांडेय ने कहा कि देशभर की महिलाओं को उम्मीद थी कि यह दिन ऐतिहासिक साबित होगा और संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पारित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने राजनीतिक श्रेय के डर से इस विधेयक का समर्थन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सदन में विपक्ष से अपील की थी कि वे श्रेय की राजनीति छोड़कर महिलाओं के हित में बिल को पारित होने दें, लेकिन विपक्ष ने ऐसा नहीं किया। उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक लाभ-हानि का मामला बन गया और महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की गई।
सरोज पांडेय ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले 27 वर्षों से लंबित है और बार-बार संसद में यह बिल पेश होता रहा है, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से इसे रोका गया। उन्होंने कहा कि इस बार भी महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है।
“महिलाओं के सपनों के साथ हुआ धोखा”
सरोज पांडेय ने कहा कि विपक्षी दलों ने एकजुट होकर महिलाओं के सपनों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता था कि महिला आरक्षण का श्रेय भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले। इसी वजह से महिलाओं के अधिकारों को पीछे धकेल दिया गया।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर आत्ममंथन करने की बात भी कही।
सड़क से संसद तक लड़ाई का ऐलान
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर सड़क से संसद तक संघर्ष करने का संकेत दिया है। सरोज पांडेय ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए जनआंदोलन चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गांधी प्रतिमा के पास से शुरू हुआ यह विरोध केवल शुरुआत है और आने वाले समय में इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। भाजपा इसे महिला सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के अधिकार से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। जहां भाजपा विपक्ष को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार पर्याप्त सहमति बनाने में विफल रही। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है।
महिला आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच लोकसभा में यह घटनाक्रम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के प्रश्न को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। अब सभी की नजर इस पर है कि सरकार इस विधेयक को आगे किस रूप में फिर से सदन में लाती है।