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Good governance Tihar is an example of change: Chhattisgarh is writing a new story of self-reliance and the lives of women and disabled people changed by government schemes.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन और जनकल्याण की योजनाएं जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। राज्य सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार अब केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित समाधान शिविरों के जरिए जरूरतमंदों को सीधे योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहा है।
तालापारा और हेमुनगर में आयोजित समाधान शिविरों ने कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इन शिविरों से लाभान्वित हुए हितग्राहियों की सफलता की कहानियां आज प्रदेश में सुशासन की नई तस्वीर पेश कर रही हैं।
तालापारा की रहने वाली ज्योति मिरी वर्षों से सब्जी व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं। रोजाना बाजार से सीमित मात्रा में सब्जियां खरीदकर मोहल्लों में बेचने वाली ज्योति की सबसे बड़ी समस्या पूंजी की कमी थी। कम निवेश के कारण उनका व्यवसाय विस्तार नहीं कर पा रहा था और आमदनी भी सीमित थी।
सुशासन तिहार के दौरान आयोजित समाधान शिविर में उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। अब वे पहले से अधिक मात्रा में सब्जियां खरीद पा रही हैं और अपने व्यवसाय को बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
ज्योति का कहना है कि यह आर्थिक सहायता उनके लिए सिर्फ ऋण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर है। इससे उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अपर्णा डे लंबे समय से घर से सिलाई का काम कर अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही थीं। हुनर होने के बावजूद संसाधनों की कमी उनके विकास में बाधा बन रही थी। पर्याप्त मशीनें और आवश्यक सामग्री नहीं होने के कारण कई बार उन्हें ऑर्डर लौटाने पड़ते थे।
समाधान शिविर के माध्यम से मिली सहायता ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी है। अब वे अपने सिलाई सेंटर का विस्तार करने और नई मशीनें खरीदने की तैयारी कर रही हैं।
अपर्णा का मानना है कि सरकारी सहायता ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और अब वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगी।
सुशासन तिहार के तहत हेमुनगर में आयोजित समाधान शिविर में 80 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। यह पहल केवल एक वाहन वितरण कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र जीवन की नई शुरुआत साबित हुई।
बिरकोना निवासी वीणा सिंह एक निजी संस्था में कार्यरत हैं। उन्हें रोजाना कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनकी यह निर्भरता समाप्त हो गई है।
अब वे अपने समय और सुविधा के अनुसार कहीं भी आ-जा सकती हैं। वीणा के लिए यह ट्राईसाइकिल केवल एक साधन नहीं बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्रता का प्रतीक बन गई है।
मस्तूरी की रहने वाली राजीन कुर्रे सिलाई कार्य कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। कारोबार से जुड़ी सामग्री लाने और ग्राहकों तक पहुंचने में उन्हें काफी परेशानी होती थी।
मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनका काम आसान हो गया है। अब वे अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित कर रही हैं और परिवार की जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर पा रही हैं।
कोटा विकासखंड की कक्षा 11वीं की छात्रा सतरूपा बंजारे को भी मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिली है। पहले उन्हें स्कूल आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
अब परिवहन की समस्या दूर हो गई है और वे नियमित रूप से पढ़ाई कर पा रही हैं। सतरूपा का कहना है कि इस सहायता ने उनके भविष्य के सपनों को नई दिशा दी है।
राज्य सरकार का दावा है कि सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। शिविरों में विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों को तत्काल लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार की इस पहल से महिलाओं, युवाओं, किसानों और दिव्यांगजनों सहित समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ मिल रहा है। इससे लोगों में सरकारी योजनाओं के प्रति भरोसा बढ़ा है और योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच रहा है।
अपर्णा डे, ज्योति मिरी, वीणा सिंह, राजीन कुर्रे और सतरूपा बंजारे जैसी हितग्राहियों की कहानियां अब प्रदेश में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन चुकी हैं। ये उदाहरण बताते हैं कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचे, तो उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।
सुशासन तिहार के माध्यम से छत्तीसगढ़ में शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती दिखाई दे रही है। सरकारी योजनाओं के प्रभाव से आत्मनिर्भरता, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।