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Big action of RERA: Fine of 10 lakhs on Godrej properties, ban on sale and promotion of Doma project remains
रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने राजधानी रायपुर के डोमा क्षेत्र में प्रस्तावित आवासीय परियोजना के प्रचार-प्रसार को लेकर गोदरेज प्रॉपर्टीज पर बड़ी कार्रवाई की है। रेरा ने बिना पंजीयन के प्रोजेक्ट का विज्ञापन और प्रचार करने के मामले में कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही परियोजना में किसी भी प्रकार की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक को यथावत रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, गोदरेज प्रॉपर्टीज ने डोमा क्षेत्र में "गोदरेज प्रॉपर्टीज रेजिडेंशियल प्लॉट्स" नाम से एक आवासीय परियोजना प्रस्तावित की थी। इस प्रोजेक्ट को रेरा से पंजीयन प्राप्त नहीं हुआ था और इस पर पहले से रोक लगी हुई थी।
इसके बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर परियोजना के प्लॉट्स के विज्ञापन जारी किए गए। प्रचार सामग्री में 1000 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 44 लाख रुपये, 1250 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 55 लाख रुपये और 1500 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 65 लाख रुपये बताई गई थी। विज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि परियोजना 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है।
मामले की शिकायत रेरा तक पहुंचने के बाद प्राधिकरण ने इसे गंभीरता से लिया। शुरुआती जांच में परियोजना से जुड़े एजेंटों को ब्लैकलिस्ट कर उनके कार्य पर रोक लगाई गई। इसके बावजूद प्रचार गतिविधियां जारी रहने पर रेरा ने कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रेरा अध्यक्ष संजय शुक्ला ने कंपनी को दोषी मानते हुए जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
रेरा के अनुसार, बिना पंजीयन के किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का प्रचार-प्रसार, विज्ञापन या बिक्री करना छत्तीसगढ़ रेरा अधिनियम की धारा 3(1) का उल्लंघन है। यह अधिनियम की धारा 59 के तहत दंडनीय अपराध भी है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि परियोजना की वास्तविक बिक्री हुई या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। केवल विज्ञापन जारी करना भी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कहा गया कि डोमा स्थित 50.03 एकड़ भूमि पर उसका वैध स्वामित्व है। कंपनी ने दावा किया कि संबंधित खसरों की जमीन उसके कब्जे में है और अब तक किसी भी प्लॉट की बिक्री या बुकिंग नहीं की गई है।
कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि सोशल मीडिया पर उसके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है और कुछ विज्ञापन भ्रामक तरीके से प्रसारित किए गए हैं।
हालांकि रेरा ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और इसे अधिनियम के उल्लंघन का मामला माना।
रेरा के आदेश के अनुसार कंपनी को 10 लाख रुपये का जुर्माना 45 दिनों के भीतर जमा करना होगा। निर्धारित समयावधि में राशि जमा नहीं करने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके साथ ही परियोजना को रेरा से विधिवत पंजीयन मिलने तक जमीन की खरीदी-बिक्री और बुकिंग पर रोक जारी रहेगी।
रेरा रजिस्ट्रार आस्था राजपूत ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद परियोजना का सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। शिकायत और सुनवाई के बाद रेरा अध्यक्ष ने कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही प्रोजेक्ट की जमीन पर किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोक बरकरार रखने के निर्देश दिए गए हैं।