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CG News: 'Passion for cricket' resonates in Bastar, Sachin Tendulkar fulfills 3-year-old promise
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में दिन यादगार बन गया, जब पहली बार क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर ने यहां कदम रखा। उनके साथ परिवार की मौजूदगी ने इस दौरे को और खास बना दिया। बस्तर के लोगों और खासकर बच्चों के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था।
वादा निभाने पहुंचे मास्टर ब्लास्टर, बच्चों की मेहनत का मिला इनाम
यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि तीन साल पहले बच्चों से किए गए वादे को पूरा करने का एक भावनात्मक पल था। सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के जरिए 2021-22 में बस्तर के 50 खेल मैदानों को विकसित करने की पहल शुरू की गई थी। उसी दौरान सचिन ने बच्चों से कहा था कि जो मैदान सबसे बेहतर तरीके से संजोया जाएगा, वह खुद वहां आकर खिलाड़ियों से मिलेंगे।दंतेवाड़ा के छिंदनार के बच्चों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और श्रमदान से मैदान को ऐसा संवारा कि वह किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रतीत होने लगा। इसी समर्पण ने सचिन को यहां आने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों को बताया ‘डायमंड’, दी मेहनत और ईमानदारी की सीख
अपने संक्षिप्त लेकिन प्रेरक संबोधन में सचिन ने बस्तर के बच्चों को ‘डायमंड’ बताते हुए कहा कि उनमें अपार ऊर्जा है, बस उसे सही दिशा देने की जरूरत है। उन्होंने कोचिंग और अनुशासन की अहमियत पर जोर दिया और युवाओं को शॉर्टकट से दूर रहने की सलाह दी।उन्होंने साफ कहा कि सफलता का असली पैमाना वही है, जब आपकी मेहनत की सराहना दूसरे लोग करें। यह संदेश बच्चों के लिए जीवनभर याद रखने वाला साबित हुआ।
25 मैदान तैयार, 25 पर काम जारी, आगे और विस्तार की योजना
फाउंडेशन के प्रयासों से अब तक 25 मैदान पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 25 अन्य पर काम जारी है। सचिन ने संकेत दिया कि अगर इसी तरह सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले समय में 50 और मैदानों को विकसित किया जा सकता है।इन मैदानों पर क्रिकेट के साथ फुटबॉल, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स जैसी खेल सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को बड़ा मंच मिल रहा है।
खेल से बदली तस्वीर, हजारों युवाओं को मिला नया रास्ता
इन पहलों का असर साफ नजर आने लगा है। दंतेवाड़ा और आसपास के इलाकों से करीब 2500 से अधिक युवा खिलाड़ी सामने आए हैं। खेल के जरिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।
जन्मदिन से पहले बस्तर में जश्न, बच्चों संग काटा केक
सचिन का जन्मदिन 24 अप्रैल को होता है, लेकिन बस्तर के बच्चों के बीच उन्होंने दो दिन पहले ही केक काटकर जश्न मनाया। इस दौरान पूरा माहौल खुशी और उत्साह से भर गया। बच्चों ने गीत गाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और उन्होंने भी सभी के साथ इस खास पल को साझा किया।
बस्तर के लिए नई उम्मीद, खेल के जरिए बदल रही तस्वीर
सचिन तेंदुलकर का यह दौरा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं के लिए प्रेरणा और नई उम्मीद का संदेश बनकर सामने आया है। खेल के जरिए बदलती यह तस्वीर आने वाले समय में क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धियों का आधार बन सकती है।