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10 to 15 patients are being referred daily from AIIMS Raipur; over 60 arrived at Ambedkar Hospital in 10 days... questions raised regarding critically ill patients.
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स रायपुर की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पतालों में भेजे जाने का मामला सामने आया है। आंबेडकर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के अनुसार पिछले 10 दिनों में एम्स से 60 से ज्यादा मरीज वहां पहुंचे हैं। इनमें न्यूरो, मेडिसिन, कार्डियोलॉजी, आर्थोपेडिक्स, गैस्ट्रो और ईएनटी से जुड़े मरीज शामिल हैं। एम्स से मरीजों को डीकेएस अस्पताल भी भेजे जाने की जानकारी है।इस तरह औसतन रोज 10 से 15 मरीजों के दूसरे अस्पतालों में भेजे जाने की स्थिति सामने आ रही है। हालांकि एम्स प्रबंधन इसे रेफरल के बजाय डाउन रेफरल बता रहा है और इसके पीछे मरीज की स्थिति तथा अस्पताल में उपलब्ध बेड को प्रमुख आधार बताया गया है।
एम्स रायपुर में गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए प्रदेशभर से मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में इमरजेंसी से मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजे जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत है कि कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार और स्थिति स्थिर करने के बाद आंबेडकर अस्पताल या डीकेएस भेज दिया जाता है।आंबेडकर अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि केवल 10 दिनों में 60 से अधिक मरीज वहां पहुंचे हैं। यह संख्या सिर्फ आंबेडकर अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की है। डीकेएस भेजे गए मरीजों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
इसी बीच भोपाल एम्स की इमरजेंसी व्यवस्था का उदाहरण भी सामने आया है। एम्स भोपाल ने करीब एक वर्ष पहले इमरजेंसी में नो रेफरल पॉलिसी लागू करने की घोषणा की थी। इस व्यवस्था के तहत इमरजेंसी में आने वाले मरीज को जांच और प्राथमिक उपचार किए बिना दूसरे अस्पताल नहीं भेजा जाता।कम गंभीर मरीजों के लिए इमरजेंसी ओपीडी में तत्काल उपचार की व्यवस्था की गई है, जबकि गंभीर मरीजों को एम्स में ही उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।
एम्स रायपुर में मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पताल भेजने की व्यवस्था के पीछे दिल्ली एम्स की इमरजेंसी प्रणाली का उदाहरण दिया जाता है। दिल्ली में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद ऐसी व्यवस्था विकसित की गई थी, जिसमें मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद कम गंभीर मामलों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जाता था।इसी व्यवस्था को डाउन रेफरल कहा गया। रायपुर एम्स में भी मरीज की चिकित्सकीय जांच के बाद उसकी स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए दूसरे सरकारी अस्पताल में भेजने का निर्णय लिया जाता है।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मृत्युंजय राठौर के अनुसार अस्पताल में छोटे से लेकर गंभीर बीमारी वाले मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। बेड की उपलब्धता और मरीज की स्थिति को देखते हुए पहले चिकित्सकीय मूल्यांकन किया जाता है।उनके अनुसार यदि जांच के बाद मरीज की स्थिति कम गंभीर पाई जाती है तो उसे आंबेडकर अस्पताल या किसी अन्य सरकारी अस्पताल भेजा जाता है। एम्स प्रबंधन इस प्रक्रिया को सामान्य रेफरल के बजाय डाउन रेफरल के रूप में देखता है।