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2,000 B.Ed. seats and 400 D.El.Ed. seats remain vacant; insufficient number of students found even after two rounds of counseling.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय और निजी शिक्षा महाविद्यालयों में बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर युवाओं की रुचि कम होती दिखाई दे रही है। दो चरण की काउंसलिंग पूरी होने के बाद भी प्रदेश में बीएड की करीब 2 हजार और डीएलएड की लगभग 400 सीटें खाली हैं।प्रदेश के कॉलेजों में बीएड की कुल 14,495 और डीएलएड की 6,710 सीटें उपलब्ध हैं। दूसरे और तीसरे चरण के आवंटन में बीएड की 946 सीटें आवंटित की गई थीं। इसके बावजूद पहले से खाली 1,445 सीटों के अलावा कुछ विद्यार्थियों ने आवंटन मिलने के बाद भी प्रवेश नहीं लिया। इससे रिक्त सीटों की संख्या बढ़कर करीब 2 हजार हो गई।
बीएड की रिक्त सीटों का सबसे बड़ा हिस्सा दुर्ग और भिलाई के कॉलेजों में बताया जा रहा है। प्रदेश में शिक्षा महाविद्यालयों की संख्या भी इसी क्षेत्र में अधिक है। अधिकारियों के अनुसार, बीएड की अपेक्षा डीएलएड में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों का रुझान कुछ बेहतर है।विभागीय अधिकारियों का मानना है कि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की रिक्तियां अपेक्षाकृत अधिक निकलती हैं, जबकि व्याख्याता पदों पर भर्ती के अवसर सीमित हैं। इस वजह से अभ्यर्थी डीएलएड को अधिक उपयोगी विकल्प मान रहे हैं।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) खाली सीटों को भरने के लिए प्रयास कर रही है। परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तीसरे और अंतिम चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी कर दिया है।एससीईआरटी के अधिकारियों के मुताबिक, मेरिट सूची में स्थान पाने वाले कुछ अभ्यर्थी सीट आवंटित होने के बाद भी प्रवेश नहीं लेते। इस तरह वे सीट रोककर रखते हैं और प्रवेश लेने के इच्छुक दूसरे विद्यार्थियों को मौका नहीं मिल पाता।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के अनुसार, प्रदेश में पर्याप्त संख्या में शिक्षक पदों पर भर्ती नहीं होने से बीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के प्रति युवाओं का आकर्षण घटा है।उन्होंने बताया कि अब तक प्रवेश प्रक्रिया में कुल आठ आवंटन सूचियां जारी हो चुकी हैं। इस बार तीसरे चरण की काउंसलिंग के बाद भी करीब एक हजार सीटें खाली रह जाने का अनुमान है।