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Private individuals were being tasked with government work in the Durg Collectorate record room; departmental inquiries initiated against 5 employees.
दुर्ग। दुर्ग कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में कर्मचारियों की मिलीभगत से निजी व्यक्तियों द्वारा सरकारी काम कराए जाने का मामला सामने आया है। एक महिला वकील की शिकायत के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने खुद रिकॉर्ड रूम पहुंचकर औचक जांच की। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर चार महिला कर्मचारियों और एक प्यून के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, रिकॉर्ड रूम में पदस्थ कर्मचारी कथित तौर पर आर्थिक लाभ के लिए बाहरी लोगों से काम करवा रहे थे। निजी व्यक्ति ही लोगों को सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध करा रहे थे। इतना ही नहीं, वे रिकॉर्ड शाखा में बैठकर सरकारी दस्तावेजों की छानबीन भी करते थे।आरोप है कि निजी लोगों के जरिए काम कराने वालों को जल्दी सुविधा मिल जाती थी, जबकि आम नागरिकों और ग्रामीणों को अपने दस्तावेज हासिल करने के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते थे। स्थानीय स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि एक महिला वकील ने उनसे मिलकर रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर शिकायत की थी। इसके बाद वे वकील के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की।रिकॉर्ड रूम में सुकन्या राव, पुष्पा वर्मा, भानुमति मरकाम और उषा यादव पदस्थ थीं। इनके साथ प्यून बलदाऊ यादव की भी ड्यूटी थी। वकीलों ने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के नाम पर आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत भी की थी।प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पांचों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
मामले में शामिल एक महिला कर्मचारी दो दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुई हैं। विभागीय जांच पूरी होने तक उनका सेवानिवृत्ति से जुड़ा बाकी भुगतान रोक दिया गया है। फिलहाल उन्हें केवल जीपीएफ और बीमा की राशि दी गई है। जांच में आरोपों से मुक्त होने पर शेष राशि जारी की जाएगी।वहीं, अन्य तीन महिला कर्मचारियों और प्यून को रिकॉर्ड रूम से हटाकर दूसरी शाखाओं में पदस्थ कर दिया गया है।
डिप्टी कलेक्टर खेमलाल वर्मा के मुताबिक, सभी संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।