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A big blow to the expansion of medical education in the state, a shower of questions on five new colleges not getting recognition from the NMC
रायपुर। छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की बड़ी योजना को नेशनल मेडिकल कमीशन के फैसले से तगड़ा झटका लगा है। राज्य के पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने से एनएमसी ने इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद एक साथ 250 एमबीबीएस सीटें बढ़ाने की तैयारी भी अटक गई है। फिलहाल राज्य में 10 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जहां कुल 1430 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं।एनएमसी के इस रुख के बाद मेडिकल शिक्षा विभाग की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि कई कॉलेजों में अभी तक बुनियादी ढांचा पूरा नहीं हो पाया था।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। आईएमए रायपुर के अध्यक्ष डा कुलदीप सोलंकी ने कहा कि मौजूदा मेडिकल कॉलेज ही बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में नए कॉलेज खोलने की जल्दबाजी समझ से परे है।उन्होंने कहा कि रायपुर से लेकर कांकेर, महासमुंद और कोरबा जैसे जिलों में हॉस्टल, भवन और मेस जैसी जरूरी सुविधाओं की भारी कमी है। कई जगह छात्रों को मूलभूत सुविधाएं भी ठीक से उपलब्ध नहीं हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली की एक बड़ी समस्या स्टाफ की कमी भी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार सीनियर रेजिडेंट के लगभग 72 प्रतिशत पद खाली हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के 56 प्रतिशत और रीडर व प्रोफेसर स्तर पर करीब 52 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2020 के बाद से स्थायी भर्ती नहीं होने के कारण पूरा ढांचा संविदा आधारित हो गया है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी, जांजगीर चांपा और कवर्धा में नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई थी। यहां डीन की नियुक्ति भी हो चुकी थी और कुछ स्थानों पर फैकल्टी भर्ती की प्रक्रिया जारी थी।लेकिन एनएमसी ने ऑनलाइन दस्तावेजों की जांच के बाद कई कमियां पाई और निरीक्षण की अनुमति नहीं दी। बताया जा रहा है कि कई प्रस्तावित कॉलेजों में अभी तक खुद का भवन तक तैयार नहीं है और कुछ जगहों पर अस्पताल ढांचा भी मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अनुसार एनएमसी ने दस्तावेजों में कुछ कमियां बताई हैं, जिन्हें सुधारकर दोबारा आवेदन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि 15 दिन के भीतर अपील कर सभी खामियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा का कहना है कि यह केवल तकनीकी कमियां हैं जिन्हें दूर कर लिया जाएगा और जल्द ही नए कॉलेजों में प्रवेश शुरू हो सकता है।वहीं कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि बिना पर्याप्त भवन और अस्पताल ढांचे के कॉलेज खोलने की कोशिश गलत साबित हुई है और आवेदन में गंभीर त्रुटियां थीं।
एनएमसी के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल घोषणा से मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किए जा सकते। बुनियादी ढांचा, स्टाफ और अस्पताल सुविधाओं के बिना मंजूरी मिलना मुश्किल है। अब राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने कॉलेजों को मजबूत करने और नई प्रक्रिया को मानकों के अनुसार तैयार करने की है।