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A heated debate erupts in court over the Bhojshala controversy, a clash of arguments between history and faith.
इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की खंडपीठ में धार स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रही सुनवाई में गुरुवार को भी बहस जारी रही। यह मामला लंबे समय से इतिहास, आस्था और कानूनी पहलुओं के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
सलमान खुर्शीद के तर्क, सत्ता संघर्ष से जोड़ा मंदिरों को नुकसान
मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में अपनी दलील रखते हुए कहा कि राजा भोज के निधन के बाद करीब डेढ़ सदी तक धार पर कई आक्रमण हुए। उन्होंने तर्क दिया कि इन हमलों का सीधा संबंध धर्म से नहीं था, बल्कि उस समय के शासकों के बीच सत्ता और प्रभुत्व की लड़ाई का हिस्सा थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार विरोधी राजाओं ने एक दूसरे के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया, जो उस दौर में विजय का प्रतीक माना जाता था।
इतिहास का हवाला, कई आक्रमणों में हुआ नुकसान
खुर्शीद ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण भारत और गुजरात के शासकों ने भी धार पर हमले किए, जिनमें लूटपाट और तोड़फोड़ हुई। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1055 और उसके बाद भी कई बड़े हमलों में शहर को भारी नुकसान पहुंचा।
मुस्लिम शासन के समय का उल्लेख, निर्माण सामग्री के उपयोग का दावा
दलील में यह भी कहा गया कि जब 1305 के आसपास मुस्लिम शासक यहां पहुंचे, तब तक धार पहले ही कई आक्रमणों से प्रभावित हो चुका था। ऐसे में नए निर्माण के लिए पहले से उपलब्ध सामग्री का ही उपयोग किया गया।
वक्फ संपत्ति का दावा, कानूनी स्थिति पर जोर
खुर्शीद ने अदालत को बताया कि 24 अगस्त 1935 को जारी वक्फ नोटिफिकेशन के तहत इस विवादित स्थल को वक्फ संपत्ति घोषित किया जा चुका है। इस आधार पर उन्होंने मस्जिद पक्ष का दावा मजबूत करने की कोशिश की।
इतिहास बनाम आस्था, फैसले पर टिकी निगाहें
भोजशाला विवाद में दोनों पक्ष अपने अपने तर्क और प्रमाण पेश कर रहे हैं। अदालत में चल रही इस सुनवाई को केवल कानूनी नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस पर है कि कोर्ट इन जटिल पहलुओं के बीच किस आधार पर अपना निर्णय सुनाता है।