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A major discrepancy has emerged in the voter list in UP, with records for 2.4 crore voters showing inconsistencies; special emphasis is being placed on the inclusion of women's names.
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पंचायत और विधानसभा की मतदाता सूचियों के बीच करीब 2.4 करोड़ मतदाताओं का भारी अंतर सामने आया है। इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने विधानसभा, पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की मतदाता सूचियों का आपस में मिलान करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची से छूटे हुए पात्र नागरिकों की पहचान कर उनका नाम शामिल करना है।
निर्देशों के मुताबिक, सभी जिला निर्वाचन अधिकारी 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027' के तहत मतदाता सूचियों की जांच करेंगे। इस अभियान के लिए 1 जनवरी 2027 को कट-ऑफ तारीख निर्धारित की गई है। अधिकारी अलग-अलग चुनावों की वोटर लिस्ट का मिलान कर उन योग्य नागरिकों की पहचान करेंगे, जिनके नाम किसी कारणवश विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
मतदाता सूची में महिलाओं का अनुपात असामान्य रूप से कम पाए जाने के बाद निर्वाचन विभाग ने इस दिशा में विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत राशन की दुकानों, शिक्षण संस्थानों और स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाएगी। इन माध्यमों से पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
अभियान के दौरान मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से छूटे पात्र नागरिकों से फॉर्म-6 भरवाया जाएगा। निर्वाचन विभाग का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। इसके लिए जिला स्तर पर अधिकारियों को अभियान की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।