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A major political move ahead of 2029... Will Lok Sabha seats increase in every state? A new bill could change the landscape.
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2029 से पहले केंद्र सरकार परिसीमन को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है। चर्चा है कि संसद के मानसून सत्र में संशोधित परिसीमन विधेयक पेश किया जा सकता है। इस प्रस्तावित विधेयक में सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसका उद्देश्य विपक्षी दलों की आपत्तियों को दूर करते हुए व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना और विधेयक के लिए जरूरी दो तिहाई समर्थन सुनिश्चित करना माना जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
गृहमंत्री अमित शाह पहले ही संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी भी राज्य की मौजूदा लोकसभा सीटों में कटौती नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। विपक्ष का तर्क था कि यह केवल मौखिक आश्वासन है और इसे विधेयक का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बहस के दौरान शाह ने संशोधित विधेयक लाने का भरोसा भी दिया था।
एनसीपी (शरद) की नेता सुप्रिया सुले ने कहा है कि यदि नया परिसीमन विधेयक आता है तो उनकी पार्टी 24 घंटे के भीतर अपना रुख स्पष्ट कर देगी। उन्होंने कहा कि पहले भी सभी राज्यों की सीटें बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन विधेयक में इसका उल्लेख नहीं था। इसी वजह से उनकी पार्टी ने विरोध किया था। सुले ने उन अटकलों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि उनकी पार्टी ने समर्थन के बदले किसी तरह का राजनीतिक समझौता किया है।
केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर सभी दलों के बीच सहमति का रास्ता तलाश रही है। सरकार का मानना है कि क्षेत्रीय दलों के सहयोग के बिना परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। इसी कारण डीएमके, एनसीपी (शरद) और अन्य क्षेत्रीय दलों के रुख पर विशेष नजर रखी जा रही है।
सरकार का तर्क है कि यदि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान अनुपात में वृद्धि की जाती है तो दक्षिणी राज्यों के साथ किसी तरह के भेदभाव या प्रतिनिधित्व घटने की आशंका समाप्त हो सकती है। दूसरी ओर विपक्ष चाहता है कि इस व्यवस्था को कानून का हिस्सा बनाया जाए, ताकि भविष्य में इसकी अलग-अलग व्याख्या की गुंजाइश न रहे।यदि प्रस्तावित विधेयक में 50 प्रतिशत सीट वृद्धि का प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल किया जाता है, तो इसे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।