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Data linked to the country's largest nuclear plant surfaces on the dark web... agencies launch investigation... security concerns mount.
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़ी कथित गोपनीय फाइलें डार्क वेब पर सामने आने के दावे के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रैनसमवेयर समूह वर्ल्ड लीक्स ने बड़ी संख्या में दस्तावेज जारी करने का दावा किया है। इनमें संयंत्र के कुछ हिस्सों के कथित ब्लूप्रिंट, आपूर्तिकर्ताओं से जुड़ी सूचनाएं और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह जानकारी उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से संबंधित डेटा के जरिए सामने आई है। कंपनी इस परियोजना के प्रमुख अनुबंधकर्ताओं में शामिल है। हालांकि, लीक हुए दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिलायंस समूह ने रॉयटर्स को दिए बयान में स्वीकार किया है कि तीसरे पक्ष के डेटा सेंटर प्रदाता योटा के एक सर्वर में आंशिक डेटा उल्लंघन हुआ है। कंपनी ने बताया कि इस घटना की जानकारी भारत सरकार को दे दी गई है। हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर कौन सा डेटा प्रभावित हुआ है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने जांच शुरू कर दी है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संवेदनशील तकनीकी जानकारी वास्तव में लीक हुई है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला हो सकता है।
डार्क वेब पर उपलब्ध कराए गए कथित डेटा में बैठकों, निरीक्षणों और जांच से जुड़े दस्तावेज भी शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दस्तावेजों की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की विस्तार से पड़ताल कर रही हैं।