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A secret hidden in a maize field shocked everyone; now, after 143 days, a 939-page charge sheet is set to reveal several major secrets.
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आए बहुचर्चित अवैध अफीम खेती मामले में जेवरा सिरसा पुलिस ने 143 दिन की जांच पूरी करने के बाद अदालत में 939 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में आठ आरोपियों को आरोपी बनाया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ इनाम भी घोषित कर रखा है।
पुलिस ने विकास विश्नोई, विनायक ताम्रकार, मनीष ठाकुर, छोटू राम, रणछोड़ राम, सुनील देवासी, मदरूपा राम और सुखाराम के खिलाफ चार्जशीट पेश की है। वहीं अचला राम और श्रवण विश्नोई अब भी फरार हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए तीन-तीन हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
चार्जशीट में कुल 79 गवाहों को शामिल किया गया है। इनमें नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी, एफएसएल की वैज्ञानिक, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, प्रधान आरक्षक, महिला आरक्षक और 14 सिपाही शामिल हैं। जिस जमीन पर अवैध अफीम की खेती मिली थी, उससे जुड़े दस्तावेज और शपथ पत्र भी साक्ष्य के रूप में पेश किए गए हैं।
जांच में सामने आया कि समोदा गांव में 5.609 एकड़ जमीन पर मक्के की फसल के बीच अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। सूचना मिलने के बाद 6 मार्च 2026 को पुलिस, एनसीबी, एफएसएल, राजस्व और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई। अगले दिन मौके पर पहुंचकर एफएसएल जांच में पौधों के अफीम होने की पुष्टि हुई।
एनसीबी के आकलन के अनुसार खेत में 14 लाख 30 हजार 100 अफीम के पौधे पाए गए, जिनका अनुमानित वजन करीब 62 हजार किलोग्राम था। मौके से 66.33 किलोग्राम अफीम डोडा भी बरामद किया गया।
मुख्य आरोपी विकास विश्नोई से पूछताछ के दौरान कई अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई। इसके बाद पुलिस ने विनायक ताम्रकार और मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया। आगे की कार्रवाई में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर छोटू राम, रणछोड़ राम, सुनील देवासी, मदरूपा राम और सुखाराम को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अफीम, अफीम के बीज, खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, हिसाब-किताब के रजिस्टर, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ट्रैक्टर, जेसीबी, हार्वेस्टर, मोटरसाइकिल, सिंचाई पंप, स्प्रिंकलर और सीसीटीवी कैमरे समेत बड़ी मात्रा में सामान जब्त किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन साक्ष्यों से पूरे नेटवर्क और अवैध कारोबार की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।