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Mahanadi's Rising Fury: Floodwaters Enter Nisda Village; Dozens of Lives Saved in Rescue Operation
आरंग। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आरंग क्षेत्र में हालात गंभीर बना दिए हैं। महानदी और आसपास की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद निसदा और समोदा डेम के कई गेट खोले गए, जिसके चलते निसदा गांव बाढ़ की चपेट में आ गया। देखते ही देखते पानी गांव के निचले इलाकों में फैल गया और कई घरों के भीतर तक पहुंच गया। सड़कों पर पानी भर जाने से गांव का संपर्क प्रभावित हो गया और लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया।
बाढ़ के बीच सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति तब बनी जब एक परिवार के छह सदस्य अपने घर में ही पानी से घिर गए। जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था। सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल राज्य आपदा मोचन बल की टीम को मौके पर भेजा।तेज बहाव और जोखिम भरे माहौल के बीच जवानों ने मोटर बोट के जरिए रेस्क्यू अभियान चलाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस कार्रवाई ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया।
आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा के मुताबिक बाढ़ प्रभावित निसदा गांव से अब तक कुल 13 परिवारों के 48 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें 12 परिवारों के 42 सदस्य पहले ही राहत शिविरों में पहुंचाए गए थे, जबकि बाद में फंसे छह लोगों को भी सफलतापूर्वक बचा लिया गया।प्रशासनिक अमला लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत एवं बचाव संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी थी। नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कर लोगों को संभावित खतरे की जानकारी दी गई और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की गई।अधिकारियों ने ग्रामीणों को नदी, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही किसी भी अफवाह पर भरोसा नहीं करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है।
निसदा निवासी सियाराम साहू और उनके परिवार को सुबह ही ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी थी। उस समय खतरा गंभीर नहीं लगने के कारण परिवार ने घर छोड़ने से इनकार कर दिया। लेकिन कुछ ही घंटों में हालात तेजी से बदल गए और उनका मकान पूरी तरह पानी से घिर गया।जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तब प्रशासन और एसडीआरएफ को संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाना पड़ा। समय रहते की गई कार्रवाई से परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित बच गए।
बाढ़ की सूचना मिलते ही आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे और थाना प्रभारी हरीश साहू अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पानी का बहाव इतना तेज था कि सामान्य नावों से बचाव कार्य करना संभव नहीं था। इसके बाद विशेषज्ञ एसडीआरएफ टीम को बुलाया गया।दूसरी ओर ग्राम पंचायत ने भी उल्लेखनीय सक्रियता दिखाई। सरपंच मानसिंग, सचिव गोपाल चंद्राकर और पंचायत कर्मियों ने जोखिम वाले इलाकों की पहचान कर प्रभावित परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। उनकी सतर्कता के कारण दर्जनों लोगों को बाढ़ के खतरे से बचाया जा सका।
जहां एक ओर ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं आरंग नगर भी जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। पिछले कई दिनों से जारी बारिश के कारण वार्ड क्रमांक-1 की एक कॉलोनी पूरी तरह पानी से घिर गई है।सड़कों पर जमा पानी के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों, विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों के सामने पानी भर जाने से दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जल निकासी की समस्या को लेकर नगर पालिका से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते नालियों और ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।फिलहाल प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि नगर क्षेत्र में जलभराव की समस्या भी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।