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A woman who washed utensils to run her household became a minister... Kalita Majhi's story changed the definition of politics.
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक ऐसी कहानी का गवाह बना, जिसने लोकतंत्र की ताकत को नए अंदाज में सामने रखा। कभी दूसरों के घरों में काम कर परिवार का खर्च चलाने वाली कलिता माझी अब राज्य सरकार में मंत्री बन गई हैं। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही संघर्ष, मेहनत और जमीनी राजनीति की एक प्रेरक यात्रा चर्चा का केंद्र बन गई।
2500 रुपये की कमाई से मंत्री पद तक पहुंची कलिता
पूर्व बर्द्धमान जिले के आठसग्राम विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनीं कलिता माझी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक समय ऐसा था जब वह घर-घर जाकर चौका-बर्तन का काम करती थीं और महीने में 2500 से 4000 रुपये तक कमाकर परिवार चलाती थीं।
राजनीति में उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में कदम रखा। लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने और लोगों के बीच काम करने के दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
हार नहीं मानी, पांच साल बाद मिली बड़ी जीत
2021 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बावजूद कलिता माझी ने क्षेत्र नहीं छोड़ा। लगातार जनता के बीच सक्रिय रहीं और पांच वर्षों तक संगठन को मजबूत करने में जुटी रहीं। इसी मेहनत का परिणाम 2026 के चुनाव में देखने को मिला, जब उन्होंने मजबूत राजनीतिक चुनौती को पार करते हुए जीत दर्ज की।
कैबिनेट विस्तार में 35 नए चेहरों को मिली जगह
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 35 नए मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 13 कैबिनेट मंत्री, 3 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 हो गई है।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष फोकस
नई कैबिनेट में सामाजिक प्रतिनिधित्व को विशेष महत्व दिया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से 13 नेताओं को जगह दी गई है। साथ ही मतुआ और राजबंशी समुदायों को भी प्रतिनिधित्व मिला है। मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्रियों को शामिल कर महिला भागीदारी को भी मजबूत किया गया है।
युवा ऊर्जा और अनुभव का अनोखा मिश्रण
नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षाविदों, पेशेवरों और खेल जगत से जुड़े व्यक्तियों को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। इससे सरकार प्रशासनिक दक्षता और जमीनी जुड़ाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती नजर आ रही है।
कलिता माझी बनीं लोकतंत्र की नई मिसाल
कलिता माझी की कहानी केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनका मंत्री पद तक पहुंचना यह संदेश देता है कि लोकतंत्र में मेहनत, जनसमर्थन और समर्पण के दम पर किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है।