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After the ₹550 crore coal levy scam, a ₹1,900 crore iron ore levy scam has also come to light.
कोल लेवी घोटाले की जांच में कथित अवैध वसूली का दायरा कोयला परिवहन से आगे बढ़कर लौह अयस्क यानि आयरन ओर परिवहन तक पहुंच गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, जब्त डायरी में तत्कालीन जिम्मेदार आइएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य को करीब एक करोड़ रुपए दिए गए। मौर्य कोयला घोटाले में निलंबित आइएएस रानू साहू के पति भी हैं। जब्त डायरी में यह दावा किया जा रहा है, कि लौह अयस्क परिवहन में प्रति टन 100 रुपए का भुगतान हुआ। कोयला परिवहन में प्रति टन 25 रुपए वसूली और कुल 550 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का पहले ही दावा किया जा चुका है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 2023 तक कांग्रेस के शासनकाल में करीब 19 करोड़ लाख टन लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन हुआ। इसी आधार पर 1905 करोड़ रुपए के घोटाले की राशि का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, यह सिर्फ एक गणितीय आकलन है। ईओडब्ल्यू ने अभी पूरे उत्पादन पर वसूली के प्रमाण एकत्र नहीं किए हैं।
इस मामले में ईओडब्ल्यू का कहना है, कि 14 सितंबर 2021 को लौह अयस्क के लिए परिवहन पास की व्यवस्था का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। 5 जनवरी 2022 के आदेश के बाद सड़क और रेलमार्ग से परिवहन शुरु हुआ। इसी दौरान जयप्रकाश मौर्य ने उद्योगपतियों की बैठक कर सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को 100 रुपए प्रति टन देने के निर्देश दिए। ईओडब्ल्यू का दावा है, कि जब्त डायरी में मौर्य के सूर्यकांत से नकद रकम प्राप्त करने, उसके संपर्क में रहने और वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने के तथ्य मिले हैं।