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Akash Anand returns to the BSP; Mayawati forgives him and restores his role as National Coordinator... decision reversed following an appeal from 'Bua-ma'.
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को बसपा में वापस लेने के साथ उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब आकाश ने पार्टी से निकाले जाने के कुछ दिन बाद मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और उन्हें 'बुआ मां' कहकर भावुक अपील की थी।मायावती ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट कर आकाश की वापसी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पार्टी और बहुजन आंदोलन के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए विचार के बाद लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार और छोटे भतीजे ईशान आनंद को भी आशीर्वाद दिया।
आकाश आनंद को पिछले महीने पार्टी से अलग कर दिया गया था। उस समय मायावती ने उन पर निजी हितों को संगठन से ऊपर रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद आकाश ने सार्वजनिक तौर पर अपनी बात रखी और मायावती से माफी मांगते हुए उनसे दोबारा मौका देने की अपील की।आकाश के इस भावुक संदेश के बाद अब मायावती ने उन्हें न सिर्फ पार्टी में वापस लिया, बल्कि पहले वाली राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी सौंप दी। इससे बसपा के भीतर आकाश की राजनीतिक भूमिका एक बार फिर मजबूत होती दिखाई दे रही है।
आकाश आनंद को मायावती ने 2023 में अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित करते हुए राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद पार्टी में उन्हें भविष्य के नेतृत्व के तौर पर देखा जाने लगा।हालांकि, उनकी राजनीतिक भूमिका लगातार स्थिर नहीं रही। मई 2024 में उनसे जिम्मेदारियां वापस ले ली गईं। इसके बाद जून 2024 में उन्हें फिर संगठन में अहम भूमिका मिली। मार्च 2025 में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से हटाकर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। अप्रैल 2025 में एक बार फिर उनकी वापसी हुई। अब पिछले महीने फिर कार्रवाई के बाद मायावती ने उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया है।इस तरह आकाश की बसपा में वापसी का यह सिलसिला पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति को भी दिखाता है।
मायावती लंबे समय से राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ अपनी राय रखती रही हैं। इसके बावजूद वर्तमान में उनके भाई आनंद कुमार के साथ दोनों भतीजे आकाश आनंद और ईशान आनंद भी पार्टी से जुडे हुए हैं।आकाश को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी वापस मिलने के बाद बसपा के संगठनात्मक ढांचे में परिवार की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो सकती है। मायावती ने हालांकि अपने फैसले को व्यक्तिगत हित के बजाय पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित से जोडकर पेश किया है।
आकाश की वापसी के साथ मायावती ने उम्मीद जताई कि अब संगठन में बार-बार बदलाव की स्थिति नहीं बनेगी। उनका संकेत साफ है कि पार्टी नेतृत्व आने वाले समय में संगठन को स्थिर रखते हुए आगे बढना चाहता है।आकाश को फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने से बसपा में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर तस्वीर बदल गई है। अब सबसे बडा सवाल यही रहेगा कि वह इस बार संगठन में अपनी भूमिका को किस तरह निभाते हैं और मायावती के भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं।