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Amidst discontent within the Trinamool, Mamata carries out a major organizational reshuffle; low attendance at the meeting sparks speculation.
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में बढ़ती हलचल और पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक में संगठनात्मक ढांचे में कई अहम बदलाव किए गए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सांसदों और विधायकों की अपेक्षाकृत कम उपस्थिति को लेकर रही।
सांसदों और विधायकों की कम मौजूदगी ने बढ़ाई अटकलें
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से केवल अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, माला राय और सुदीप बंद्योपाध्याय ही बैठक में शामिल हुए। वहीं 13 राज्यसभा सांसदों में से केवल डेरेक ओब्रायन और डोला सेन की मौजूदगी दर्ज की गई। इसके अलावा कुछ चुनिंदा विधायक ही बैठक में पहुंचे। कम उपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत की चर्चाओं को बल मिला है।
अभिषेक बने रहेंगे राष्ट्रीय महासचिव
बैठक में ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद पर अभिषेक बनर्जी ही बने रहेंगे। हालांकि संगठनात्मक समन्वय और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से डेरेक ओब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है।
डेरेक और डोला को मिली नई जिम्मेदारी
पार्टी नेतृत्व ने संगठन के पुनर्गठन के तहत डेरेक ओब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव का दायित्व सौंपा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संगठन में सामूहिक नेतृत्व और बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य बनीं प्रदेश अध्यक्ष
लंबे समय से प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे सुब्रत बक्शी को स्वास्थ्य कारणों से प्रदेश अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया। उनकी जगह वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य को तृणमूल कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सुब्रत बक्शी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
युवा तृणमूल की कमान फिर सायनी घोष के हाथ
बैठक में युवा तृणमूल कांग्रेस की जिम्मेदारी एक बार फिर सायनी घोष को सौंपने का फैसला किया गया। पार्टी नेतृत्व ने युवा संगठन को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर और अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया।
ममता ने पेश किया पुनर्गठन का रोडमैप
राजनीतिक जानकारों के अनुसार हाल के दिनों में पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों और असंतोष के संकेतों के बीच ममता बनर्जी ने संगठन के पुनर्गठन का स्पष्ट खाका पेश किया है। इससे पहले भी उनके आवास पर हुई एक बैठक में अपेक्षाकृत कम विधायक पहुंचे थे, जिसके बाद पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
तृणमूल का बचाव, कहा- यह सभी जनप्रतिनिधियों की बैठक नहीं थी
बैठक में कम उपस्थिति के सवाल पर तृणमूल कांग्रेस ने सफाई देते हुए कहा कि यह सभी सांसदों और विधायकों की बैठक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक थी। पार्टी के अनुसार कई सांसद, विधायक और नेता वर्चुअल माध्यम से भी बैठक में शामिल हुए और संगठनात्मक मुद्दों पर अपनी राय रखी।
चुनावी चुनौतियों से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद
राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस संगठन को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नए बदलावों से संगठनात्मक समन्वय बेहतर होगा और कार्यकर्ताओं के बीच नया उत्साह पैदा होगा।