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Anti-Naxal Operation: Major success for Naxal eradication campaign in Sukma, 22 Maoists surrender
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिला में चल रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। सक्रिय माओवादी गतिविधियों में शामिल कुल 22 माओवादी सदस्यों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक महिला माओवादी भी शामिल है।
पुनर्वास नीति और ‘पूना मारगेम’ अभियान का असर
पुलिस के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति और सुकमा पुलिस द्वारा संचालित ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से प्रभावित होकर माओवादियों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया। जिले में लगातार सफल सुरक्षा अभियानों, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सुदृढ़ सड़क संपर्क और विकास कार्यों की बढ़ती पहुंच के कारण माओवादी संगठन का प्रभाव तेजी से कमजोर हो रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण
आज 17 फरवरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सुकमा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण, डीआईजी सीआरपीएफ रेंज जगदलपुर एस. अरूल कुमार सहित जिला पुलिस, डीआरजी, रेंज फील्ड टीम और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विभिन्न वाहिनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सुरक्षा बलों की अहम भूमिका
माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने में डीआरजी सुकमा, जिला बल, रेंज फील्ड टीम जगदलपुर, सीआरपीएफ की 02, 74, 111, 223, 227 वाहिनियों और कोबरा 201 वाहिनी की सूचना शाखा की विशेष भूमिका रही। अधिकारियों का कहना है कि निरंतर दबाव और विकास कार्यों की पहुंच ने माओवादी संगठन को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया।
प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास सुविधाएं
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति–2025’ के तहत प्रति व्यक्ति 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ अन्य पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
पुलिस अधिकारियों ने इसे नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे, जिससे माओवादी संगठन का पूर्णतः खात्मा किया जा सके।