

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Antibiotics are becoming poison, not medicine: The government has begun to tighten the reins; now medicines will not be available without a prescription.
कोलकाता। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एंटीबायोटिक का अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इसके खिलाफ संस्थान सख्त दिशानिर्देश लागू करने जा रहा है। ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि नए एंपिरिकल प्रोटोकॉल के तहत संक्रमण के प्रकार के अनुसार एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे।
डॉक्टरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
डॉ. बहल ने बताया कि दिशानिर्देशों के तहत डॉक्टरों को यह बताया जाएगा कि किस परिस्थिति में और कितनी खुराक तक एंटीबायोटिक दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कब दवा बदलना या बंद करना जरूरी है। उनका कहना है कि किसी भी बीमारी की टेस्ट रिपोर्ट आने से पहले मरीज को एंटीबायोटिक देना ठीक नहीं है।
बिना पर्ची एंटीबायोटिक लेना खतरनाक
बिना डाक्टरी पर्ची के एंटीबायोटिक लेने या दवा की पूरी खुराक न लेने से एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। AMR की स्थिति में बैक्टीरिया बदल जाते हैं और संक्रमण में एंटीबायोटिक असर नहीं करती। डॉ. बहल ने कहा कि वायरल संक्रमण जैसे मामूली बुखार, खांसी और सर्दी में भी अनावश्यक दवा देना हानिकारक है।
राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान
ICMR और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने “AMR पर प्रहार” अभियान शुरू किया है। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रिहायशी कॉलोनियों में प्रतिदिन कार्यक्रम चलाकर लोगों को एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल और AMR के खतरों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस कदम से उम्मीद है कि देश में एंटीबायोटिक का अत्यधिक इस्तेमाल पर नियंत्रण आएगा और जनता और चिकित्सक दोनों सावधान होंगे।