

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Supreme Court dismisses 1993 Mumbai blasts convict Abu Salem's release plea
नई दिल्ली। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के दोषी कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। 25 साल की सजा पूरी होने का दावा करते हुए दायर की गई रिहाई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।
25 साल की सजा पूरी होने की दलील नामंजूर
सुनवाई के दौरान अबू सलेम के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने 25 साल की कैद पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या इस गणना में छूट (रिमिशन) को भी शामिल किया जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वास्तविक कारावास अवधि को ही आधार बनाया जा सकता है।
2005 में हुआ था भारत प्रत्यर्पण
गौरतलब है कि अबू सलेम को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत यह शर्त तय हुई थी कि सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 साल से अधिक की सजा दी जा सकती है। इसी आधार पर पुर्तगाल की अदालत ने फरवरी 2004 में उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।
पुर्तगाल ने क्यों रखी थीं शर्तें
अबू सलेम को वर्ष 2002 में पुर्तगाल में फर्जी पासपोर्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था। भारत द्वारा प्रत्यर्पण की मांग किए जाने पर पुर्तगाल ने साफ किया था कि वहां मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है और कैद की अधिकतम सीमा तय है। इसलिए भारत को यह आश्वासन देना पड़ा कि सलेम को फांसी या 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जाएगी।
1993 मुंबई बम धमाके: काले अध्याय की याद
12 मार्च 1993 को हुए मुंबई बम धमाके भारत के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में गिने जाते हैं। दोपहर करीब 1:30 से 3:40 बजे के बीच मुंबई के 12–13 प्रमुख इलाकों में आरडीएक्स से भरे कार बम विस्फोट हुए थे। इनमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, एयर इंडिया बिल्डिंग समेत कई व्यस्त स्थान निशाने पर थे। इन धमाकों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अबू सलेम की जल्द रिहाई की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और वह फिलहाल जेल में ही रहेगा।